भिवानी में बाजार की गतिविधियां 500 और 1000 के नोट में उलझ कर रह गई। वेडिंग सीजन होने के बावजूद बाजार में चौतरफा सन्नाटा दिखा। बड़े शो रूम से लेकर सिनेमा हॉल, होटल-रेस्टोरेंट व छोटे वेंडर तक का धंधा लगभग ठप रहा। सर्राफा बाजार में कारोबार नहीं हुआ। जरूरी घरेलू सामान के लिए लोग तरस गए। आटा, दूध, सब्जी जैसे दैनिक उपयोग की चीजों की खरीददारी के लिए लोग भटकते रहे। बसों व ऑटो रिक्शा में सफर करने वालों को परेशानी से दो-चार होना पड़ा। बवानीखेड़ा में निजी बस के परिचालक ने एक बुजुर्ग महिला को केवल इसलिए नीचे उतार दिया कि उसके पास पांच सौ का नोट था।
देवउठनी एकादशी जैसा महत्वपूर्ण शादी मुहूर्त होने के बावजूद बाजारों से रौनक गायब हो गई। बाजार में बिक्री नगण्य रही। शोरूम व दुकानदारों ने नोटिस चस्पाया गया कि बिल भरने के लिए पांच सौ व एक हजार के नोट मान्य नहीं। कुछेक ने नगदी की बजाय क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड से भुगतान करने पर डिस्काउंट का ऑफर दिया। सब्जी की रेहड़ियां इक्का-दुक्का ही नजर आई। सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को उठानी पड़ी, जिनके यहां सप्ताह-दस दिन के भीतर शादी है।
बुरी मार मारी, कैसे होगा बेटियों का विवाह, बढ़ गई चिंता
पांच सौ और एक हजार के नोट बंद करके सरकार ने तो मार दिए। दुकानदार या तो ये नोट ले नहीं रहे और ले रहे हैं। 16 तारीख को शादी है, इसलिए दुकानदार को चार हजार रुपये ज्यादा चुका कर सामान खरीदा। यह परेशानी केलंगा गांव से सामान खरीदने आए एक-अकेले मुकेश की नहीं है, बल्कि उन जैसे कई लोगों को खरीददारी के लिए दर-बदर होना पड़ा। मुकेश ने बताया कि सब्जी मंडी में सब्जियां खरीदनी है तो उन्हें कहां से पेमेंट करें।
सब्जी मंडी में नहीं आए खरीददार
मंगलवार रात से 500 व 1000 रुपये की करेंसी बंद करने से सब्जीमंडी व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ। रूटीन के लगभग 40 लाख का व्यापार आधे से कम स्तर पर रहा। केवल 13-15 लाख रुपये के कच्चे माल का उठान हो पाया। रेहड़ियों, छोटे सब्जी विक्रेताओं ने सामान खरीदने से तौबा की। ग्राहक के 50-100 रुपये की सब्जियां, फल खरीद 500 व 1000 रुपये के नोट देने के कारण रेहड़ी विक्रेताओं को परेशानी रही। सब्जीमंडी एसोसिएशन प्रधान गुलशन कुमार ने बताया कि मंडी में 500 व 1000 रुपये के नोट स्वीकार किए जा रहे हैं। सब्जियां खराब होने से बचाने के लिए बेचना जरूरी है, नई करेंसी नहीं आने तक पुरानी करेंसी स्वीकार की जाएगी। हालांकि माल का उठान आधे से भी कम हो गया व छुट्टे पैसों को लेकर भी परेशानी रही।
सर्राफा बाजार में चेक पेमेंट बना विकल्प
वैवाहिक सीजन के चलते सर्राफा बाजार में ज्वेलरी, नए-पुराने आभूषण खरीदने आदि की जरूरत पर 500 रुपये व 1000 रुपये के नोट का मिला-जुला असर रहा। 9 व 10 नवंबर को बैंक बंद होने से ज्यादातर ज्वेलर्स ने पुराने आर्डर को ही पूरा करने में व्यस्त रहे। तो चेक पेमेंट का विकल्प भी काम में रहा। बालाराम ज्वैलर्स संचालक अशोक तलवार ने बताया कि 500 व 1000 रुपये के नोट बंद करने के एलान के बाद नोट स्वीकार नहीं किए जा रहे। केवल पुरानी पेमेंट व पुराने आर्डर ही पूरे किए जा रहे है। 11 को बैंक खुलने के बाद नई करेंसी जारी होने के बाद ही कुछ रौनक लौटने की उम्मीद है।
पांच सौ-हजार के नोट लेकर पहुंचे बिजली उपभोक्ता लौटे निराश
बिजली बिल भरने के लिए सुबह बिजली निगम में उपभोक्ताओं की भीड़ उमड़ी। विंडो खोलने से पहले ही निगम कर्मचारियों ने नोटिस चस्पाया कि 500 व 1000 के नोट स्वीकार नहीं किए जाएंगे। जिससे उपभोक्ताओं में हड़कंप मच गया। अधिकतर उपभोक्ता पांच सौ व एक हजार के नोट लेकर ही पहुंचे थे। फिर उपभोक्ताओं को बताया गया कि एक सप्ताह की समयावधि बढ़ा दी है। उपभोक्ता प्रवीण, कृष्ण सिंधु, मुकेश, वेद कुमार चावरिया, अमित तंवर आकाश दीवान आदि ने बताया कि सरकार को कम से कम सरकारी संस्थाओं में तो वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी।
हजार का नोट दो, 900 लो
हजार का नोट दो और बदले में 900 रुपये लो। 500-1000 के नोट का चलन बंद होने के बाद कुछ ऐसे ऑफर भी मार्केट से आने लगे हैं। बिजली का बिल भरने पहुंचे सेक्टर 13 वासी सुरेश ने बताया कि उसके घर का बिजली बिल 180 रुपये आया है। उसके पास एक हजार का नोट था मगर निगम कर्मचारी इसे स्वीकार नहीं कर रहे। अब बिल भरने के लिए एक हजार रुपये के बदले एक-एक सौ के नौ नोट लाया हूं यानी नौ सौ रुपये।
पेट्रोल पंपों पर दिखी अफरातफरी
500 व 1000 रुपये के नोट बंद करने के एकाएक फैसले के बाद पेट्रोल पंपों पर सबसे ज्यादा अफरा-तफरा देखी गई। 500 व 1000 रुपये के नोट भुनाने के लिए हर कोई अपने दुपहिया वाहनों, गाड़ी, टैंपों में फ्यूल टैंक को फुल करवाने पहुंचे। तो कुछ 200-300 रुपये का पेट्रोल लेकर 500 व 1000 रुपये का नोट छुट्टे करवाने की जुगत लगाते दिखाई दिए। लेकिन हर हाथ में पांच सौ व हजार रुपये का नोट होने से पेट्रोल पंपों पर गहमागहमी बनी रही।
पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल की डिमांड बढ़ने, मंथली बिलिंग व पेंडिंग पेमेंट एकसाथ आने से रोजमर्रा से दो गुणा तक सेल बढ़ी।
चौधरी पेट्रो स्टेशन मैनेजर घनश्याम मस्ता ने बताया कि मंगलवार रात से हर कोई 500 व 1000 रुपये का नोट दे रहा है। इस कारण छुट्टे पैसों की दिक्कत बन रही है। कमोबेश पेट्रोल-डीजल की सेल बढ़कर दोगुनी तक पहुंच रही है। 11 नवंबर को दोपहर 3 बजे तक 500 व 1000 रुपये के नोट स्वीकार किए जाएंगे। उसके बाद बैंक में कैश जमा करवा दिया जाएगा।
तेल का खर्च भी नहीं निकला, कैसे चलेगा घर
शहर में औसतन प्रत्येक ऑटो चालक की एक दिन की आय आठ सौ से एक हजार होती है मगर बुधवार को बमुश्किल 150 से 200 रुपये रही। तेल का खर्च भी नहीं मिला। सवारी न मिलने से परेशान ऑटो चालकों की कुछ इसी तरह की प्रतिक्रिया आज मिली। ऑटो रिक्शा यूनियन के प्रधान रामनिवास शर्मा ने बताया कि पांच सौ के बिना तेल नहीं डाला और जिसके पास पांच सौ या एक हजार रुपये नहीं, उनके ऑटो नहीं चले।
उधारी चुकाने 500-1000 के नोट लेकर पहुंचे
पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने से जहां दिनभर मार्केट ठप रही वहीं कुछ दुकानदारों को इसका फायदा भी हुआ। नोट बंद होने की सूरत में उनकी उधारी जो लंबे समय से फंसी थी वह मिल गई। दरअसल पांच-पांच सौ और एक-एक हजार के नोट लेकर लोग अपनी उधार चुकाने बाजार पहुंचे। जिस कारण अनेक दुकानदारों को लंबे समय से फंसी उधारी के रुपये मिल गए। बिजली विभाग में भी ऐसे नजारे देखने को मिले। लंबे समय से बिल न भरने वाले लोग पांच सौ व हजार के नोट लेकर पहुंचे। लेकिन, विभाग के इनकार के बाद निराश लौटना पड़ा।
क्या रहा मार्केट के हॉल
मंगलवार को सेल बुधवार को सेल
सर्राफा बाजार करीब सवा करोड़ करीब 30 लाख
सब्जी मंड़ी 40 लाख 13-15 लमाख
ऑटो रिक्शा 900 रुपये प्रति ऑटो 200 रुपये प्रति ऑटो
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