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अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर मांगा सुख-समृद्धि का वर

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50 फोटो जूई घाट पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देती छठ वर्ती महिलाएं। संवाद - फोटो : Bhiwani
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भिवानी। भिवानी के जूई नहर स्थित छठ पूजा घाट पर रविवार शाम को पूर्वांचल क्षेत्र के सैकड़ों परिवारों का जमघट लगा। छठ महापर्व के तीसरे दिन सूर्यास्त के समय डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने से पहले घाट पर बांस की टोकरी में छठ पूजा की गई। वहीं पूजा सामग्री, फल और पकवानों को सजाकर महिलाओं ने सामूहिक रूप से छठ माता की पूजा विधि-विधान से की। वहीं, महिलाओं ने भी डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पानी में उतरकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर पूरे परिवार के लिए सुख-समृद्धि का वर मांगा।
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जूई घाट पर छठ महापूजा के लिए आई महिलाएं आरती, पूनम, कमला, मनीषा, सीमा, ज्योति और कामना ने बताया कि छठ पूजा के तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया है। इससे पहले घाट पर बांस की टोकरी में फल, सब्जी और पकवान रखकर पूजा की गई। सोमवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटे के लिए रखे कठिन व्रत का संकल्प पूरा किया जाएगा। जूई नहर घाट पर भी सैकड़ों महिलाएं अर्घ्य देने के लिए उपस्थित रहीं।
घाट पर व्यवस्था बनाने के लिए स्वयंसेवकों ने भी अहम भूमिका निभाई। वहीं घाट पर काफी महिलाओं को देखते हुए सुरक्षा के भी प्रबंध किए गए। घाट के आसपास के वाहनों का रूट भी यातायात पुलिस ने डायवर्ट कर तोशाम बाईपास पर ट्रैफिक वन-वे कर दिया। वहीं घाट से जागृति कॉलोनी की तरफ जाने वाला मार्ग भी बंद रहा। भिवानी में करीब 15 हजार पूर्वांचल क्षेत्र के परिवार यहां रह रहे हैं। जिनके लिए छठ महापर्व मुख्य पर्व के तौर पर मनाया जाता है। भिवानी में भी पूर्वांचल की संस्कृति जूई के छठ पूजा घाट पर रविवार शाम को दिखाई दी। वहीं सोमवार अल सुबह भी उगले सूर्य को अर्घ्य देने के लिए इतनी ही भीड़ जुटेगी।
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