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Bhiwani : निजी स्वीमिंग पुल की महंगी फीस, सरकारी में पड़ा ताला, जान हथेली पर रखकर गहरे टैंकों में छलांग लगा रहे बच्चे

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लापरवाही की छलांग....। बाबा लठिया वाला मंदिर में बनाए जलकुंड में नहाने के दौरान बच्चों द्वारा की ज? - फोटो : Bhiwani
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संजय वर्मा
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भिवानी। निजी स्वीमिंग पूल की फीस महंगी है। सरकारी स्वीमिंग पूल पर करीब पांच साल से ताला लगा है। ऐसी स्थिति में गरीब परिवारों के बच्चे जान हथेली पर रखकर जलघर के गहरे टैंकों में छलांग लगा रहे हैं। वहीं, नहरों और टैंकों पर रोकटोक करने वाला भी कोई नहीं है।
हर साल नहर व गहरे पानी के टैंक में डूबने से बच्चों के मौत के आंकड़ों में इजाफा हो रहा है। इसी साल गर्मियों में अब तक छह बच्चे अपनी जान गवां चुके हैं।
2017 में मरम्मत के लिए बंद हुआ था तरणताल : भीम स्टेडियम में तरणताल (स्वीमिंग पूल) बना हुआ है। यह तरणताल कई दशक पुराना हो गया है। इसे वर्ष 2017 में मरम्मत के लिए खेल विभाग ने बंद कर दिया था। इसके बाद इसे आज तक चालू नहीं किया गया है।
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निजी पूल की ढाई हजार रुपये फीस : शहर में तीन निजी स्वीमिंग पूल भी हैं। यहां बच्चों की दाखिला फीस करीब ढाई हजार रुपये है। गरीब अभिभावकों के लिए हर माह इतनी फीस चुकाना मुश्किल है। बच्चे गर्मियों की छुट्टियों में अपने तरीके से मौज मस्ती में बिता रहे हैं। शहर के जलघर के टैंकों व पानी के कुंडों में पानी के अंदर उतरना खतरनाक है, क्योंकि ये टैंक गाद से भी भरे हैं, जिनके अंदर फंसने का डर रहता है।
नहरों के तेज बहाव से भी बह रहे अभिभावकों के अरमान
गर्मियों में नहरों के अंदर पानी के तेज बहाव में भी बच्चे नहाने के लालच से पहुंच रहे हैं। तेज पानी के बहाव में बच्चे खुद को नहीं संभाल पाते और अभिभावकों के अरमान भी पानी में बच्चों की मौत के साथ बह जाते हैं। हर साल ऐसे केस पुलिस की फाइलों में केवल इत्तफाकिया मौत मामलों में दर्ज होकर रह जाते हैं।
निजी स्वीमिंग पूल में बढ़ी भीड़
निजी स्वीमिंग पूल में भीड़ भी बढ़ गई हैं। शहर के बाल भवन में बने तरणताल में 500 से अधिक बच्चे रोजाना सुबह शाम पहुंच रहे हैं, जबकि हांसी रोड के तरणताल में भी 600 से अधिक बच्चे व बड़े तैराकी का अभ्यास करने के लिए जात हैं।
मई में हुए ये हादसे
मई में बहल क्षेत्र के एक गांव में राजस्थान से बरात में आए तीन युवा किसान के खेत में बने गहरे पानी के टैंक में डूब गए थे। तीनों की मौत हो गई थी। इसी तरह पुराने जलघर के टैंक में भी नहा रहे एक युवक की जान चली गई थी, जबकि लोहारू क्षेत्र में भी एक युवक ने जोहड़ में डूबकर अपनी जान गंवा दी थी। बवानीखेड़ा क्षेत्र में भी एक युवक की जान मई में ही गई थी।
टैंकों में नहीं कोई रोकटोक, न कोई सुरक्षा
जलघर के टैंकों व ऐतिहासिक जलाशयों के पास बच्चों के नहाने की कोई रोकटोक नहीं है। यहां कोई सुरक्षा प्रबंध भी नहीं हैं। ऐसे में बच्चे भी बेझिझक यहां किसी भी समय नहाने के लिए पहुंच रहे हैं। नए पैटर्न के अनुसार हाल ही में बने वाटर टैंकों की गहराई 18 से 25 फुट तक है, जबकि क्षेत्रफल भी हजारों मीटर में फैला है। ऐसे में कोई डूबा तो उसे जीवित निकाल पाना मुश्किल है।
बच्चों पर रखें नजर
बच्चा घर से बाहर जाए तो उसकी गतिविधि पर नजर रखें। संभव हो सके तो बच्चे को पूरे दिन का शेड्यूल तय करें, ताकि बच्चा उसी के अंदर व्यस्त रहे। बच्चों को हॉबी क्लास, कोचिंग, या फिर किसी रुचि वाले काम में लगाएं। अक्सर बच्चे दोस्तों के साथ नहाने के लिए चले जाते हैं, इसलिए उन पर भी नजर रखें। (संवाद)
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उच्च अधिकारियों को अवगत कराया है
भीम स्टेडियम का स्वीमिंग पूल 2017 से बंद है। स्वीमिंग पूल काफी साल पुराना हो गया है, जिसकी मरम्मत बेहद जरूरी है। इससे पहले इसे ठेके पर दिया गया था। बाद में इसे चालू नहीं कर पाए हैं। इस संबंध में खेल विभाग के उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया गया है, उम्मीद है जल्द ही इसे चालू कराएंगे।
-जेजी बनर्जी, जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी भिवानी।
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