राजस्व विभाग के पटवारियों से नुकसान का सर्वेक्षण करा रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। जिले के अधिकांश गांवों में 25 से 33 फीसदी तो कुछ गांवों में 50 फीसदी से ज्यादा नुकसान हुआ है। गेहूं के मुकाबले किसानों की अधिकतर सरसों बर्बाद हुई है। किसान संगठन मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
भिवानी में तेज हवाओं के साथ हुई ओलावृष्टि ने जिले के 48 गांवों के किसानों की फसलों को बर्बाद कर दिया है। इन गांवों में अधिकतर किसानों की सरसों और गेहूं की फसल में नुकसान का आकलन भी राजस्व विभाग ने किया है। इसकी रिपोर्ट भी सरकार को भेजी है।
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राजस्व विभाग के सर्वेक्षण में राजस्व पटवारियों ने ओलावृष्टि से नुकसान का आंकलन भी अलग-अलग गांवों में अलग-अलग है। इसमें अधिकांश गांवों में 25 से 33 फीसदी तक फसलों में नुकसान दर्शाया है, जबकि कुछ गांवों में किसानों की फसलों में 50 फीसदी तक तो कुछ गांवों में इससे भी अधिक नुकसान दर्ज हुआ है।
गेहूं के मुकाबले किसानों की सरसों की फसल ओलावृष्टि से ज्यादा बर्बाद हुई है, जबकि गेहूं खेतों में तेज हवा से बिछ गया है। जिन किसानों का गेहूं खेत में बिछा है, उनका दाना भी अब कमजोर होगा। इससे उनका फसल उत्पादन भी घटेगा। शनिवार को ओलावृष्टि हुई थी।
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इसके बाद राजस्व विभाग की टीमों ने भिवानी, कैरू, तोशाम, बहल और लोहारू खंड में हुए नुकसान का आकलन किया। इन पटवारियों की सर्वेक्षण के बाद जिला स्तर पर ओलावृष्टि फसल बर्बादी की रिपोर्ट भी तैयार की और उसे सरकार के समक्ष भेजा गया है।
भिवानी जिले के ओलावृष्टि संभावित गांवों में राजस्व विभाग के पटवारियों से फील्ड सर्वे कराकर इसकी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेज दी गई है। सर्वेक्षण में 25 से 33 फीसदी और 50 फीसदी एवं 50 फीसदी से अधिक नुकसान है। जिले के करीब 48 गांवों में ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हुआ है। -प्रदीप देशवाल, जिला राजस्व अधिकारी भिवानी।