करीब 58 गांवों की तहसील जिसकी घोषणा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल ने भिवानी जिले की घोषणा के एक घंटे बाद की थी। आज भिवानी जिले की सबसे पुरानी तहसील में 19 गांव बचे हैं, जिनकी संख्या पहले 58 हुआ करती थी। 6 सितंबर 2022 को सूबे के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बवानीखेड़ा तहसील को उपमंडल बनाए जाने की घोषणा की थी। 52 साल बाद फिर बवानीखेड़ा तहसील सुर्खियों में आई और उपमंडल के नाम पर जमकर राजनीति हुई, लेकिन समय के साथ यह घोषणा ठंडे बस्ते में चली गई। आज बवानीखेड़ा तहसील को उपमंडल बनाए जाने की घोषणा को एक साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन यहां कभी उपमंडल बनेगा। इसकी सम्भावना कहीं दूर दूर तक नजर नहीं आ रही।
बवानीखेड़ा क्षेत्र के बुजुर्ग सतबीर बताते हैं कि हल्के ने सब पार्टियों का क्षेत्र में वर्चस्व देखा है। यहां से जनता पार्टी, लोकदल, विशाल हरियाणा पार्टी, हरियाणा विकास पार्टी के विधायक चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। लेकिन कभी बवानीखेड़ा विकास की रफ्तार नहीं पकड़ पाया। आज मौजूदा समय में भी बवानीखेड़ा तहसील के ज्यादातर गांवों से बवानीखेड़ा आने के लिए रोडवेज बसें नहीं मिलती।
बोहल, सिप्पर, रोहनात, रतेरा, जमालपुर, पपोसा ऐसे गांव हैं जिनकी दूरी बेसक तहसील कार्यालय से 10-15 किलोमीटर हो लेकिन इन्हें बवानीखेड़ा पहुंचे के लिए 40 किलोमीटर से ज्यादा सफर तय करना पड़ता है। ग्रामीण हांसी, भिवानी बस स्टैंड से बस पकड़ कर बवानीखेड़ा पहुंचते हैं। नगर पालिका बवानीखेड़ा भी कोई खास विकास कार्य नहीं करवा पाई हैं। बवानीखेड़ा में न कोई बड़ा पार्क है न खेल स्टेडियम,न ही लड़कों का काॅलेज। बवानीखेड़ा में पहले आईटीआई कॉलेज था जिससे भी तोड़ कर जमालपुर स्थानांतरित कर दिया है। नगर पालिका क्षेत्र में सीवरेज और सफाई व्यवस्था आज सबसे ज्यादा परेशानी का कारण बनी हुई है। जिससे हर गली मोहल्ले में गंदा पानी सड़कों पर खड़ा नजर आता है। पीने का पानी, स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं बुरे हाल में है। नलवा कभी बवानीखेड़ा हल्के में आता था लेकिन वहां आज अनेक उच्च शिक्षा संस्थान है।
नहरी पानी के लिए कर रहे संघर्ष
क्षेत्र के किसान रमेश ने कहा कि आज हलके के किसानों को सबसे बुरा दौर देखना पड़ रहा है। किसान नहरी पानी के अपने हक के लिए आए दिन संघर्ष कर रहे हैं। बवानीखेड़ा क्षेत्र में सिंचाई का एकमात्र साधन सुंदर ब्रांच नहर है, जिसमें बीते दिनों एक सप्ताह के बजाय केवल तीन दिन ही पानी छोड़ा गया है। यह बार बार हो रहा है कि पानी एक दो दिन चलाकर बंद कर दिया जाता है। क्षेत्र की अनाजमंडी में सभी फसलों की खरीद नहीं होती। किसानों को अपनी सब्जियां बेचने के हांसी भिवानी हिसार की मंडियों में जाना पड़ता है।
बवानीखेड़ा में नहीं कोई सब्जी मंडी
52 साल पुरानी तहसील में आज तक सब्जी मंडी भी नहीं बन पाई है। क्षेत्र में पानी की कमी है लेकिन मजबूरन किसानों को धान की फसल बोनी पड़ती है। क्योंकि क्षेत्र में धान के खरीदार उपलब्ध है लेकिन सब्जी उत्पादन को बेचने के किसानों को संघर्ष करना पड़ता है। किसान धान , गेहूं, कपास के अलावा किसी चौथी फसल के बारे में नहीं सोचते। अगर सरकार क्षेत्र में बाजार उपलब्ध करवाएं तो किसान धान, गेहूं कपास के अलावा कोई और फसल क्यों नहीं उगाएंगे। बवानीखेड़ा से 14 किलोमीटर दूर तोशाम उपमंडल आज सबसे तेजी से विकसित हो रहा है। हल्के ने पिछले दोनों विधानसभा चुनाव में भाजपा के विधायक को विजय दिलवाई है।