बाल भवन परिसर में धोखाधड़ी से वाटिका और 11 शोरूम आवंटन के मामले में आरोपी तत्कालीन बाल कल्याण अधिकारी सोमदत्त खुंडिया की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो गई है। उनके खिलाफ भिवानी के सिविल लाइन पुलिस थाना में 19 और 20 अक्तूबर को दो अलग-अलग केस दर्ज किए गए थे। मामले में अग्रिम जमानत के लिए आरोपी ने अतिरिक्त जिला न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
भिवानी के बाल भवन परिसर में शगुन वाटिका आवंटन और 11 शोरूम निर्माण के लिए भूमि आवंटन मामले में 2018 में शिकायत उपायुक्त को दी गई थी। मामले में उपायुक्त ने मामले की जांच एसडीएम से कराई थी। जांच में अनियमितताएं साबित हो गई थीं। इसके बाद जिला प्रशासन ने 11 शोरूम भूमि आवंटन को ही रद्द कर दिया था। इसी तरह बाल भवन परिसर में शगुन वाटिका आवंटन में भी प्रशासन की जांच में भारी अनियमितताएं पाई गई थीं। इसमें सामने आया था कि 2014 से 2017 तक शगुन वाटिका को साढ़े 13 लाख की सालाना लीज पर दिया गया था, मगर 2017 से 2021 तक इसे मात्र आठ लाख रुपये सालाना की लीज पर दे दिया। इसमें आवंटन के नियमों को भी ताक पर रखा गया था। मामले में तत्कालीन बाल कल्याण अधिकारी सोमदत्त खुंडिया पर उपायुक्त कार्यालय के निर्देश पर धोखाधड़ी की संंबंधित धाराओं के तहत दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई गई थी। मामले में आरोपी बाल कल्याण अधिकारी की न्यायालय ने सुनवाई के बाद अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।