लोहारू इलाके में सफेद रतवा से प्रभावित सरसों की फसल।
लोहारू। लोहारू और आसपास के इलाके में मौसम में बदलाव और नमी के चलते सरसों की फसल को मरगोजा के साथ सफेद रतवा का रोग भी नुकसान पहुंचा रहा है। कृषि अधिकारियों के अनुसार जिलेभर में सरसों की फसल पर मरगोजा का एक तिहाई प्रभाव बताया जा रहा है लेकिन लोहारू इलाके में यह असर कम है और सरसों की पछेती फसल पर सफेद रतवा रोग का भी असर बताया जा रहा है।
सरसों की फसल में मरगोजा और सफेद रतवा के असर ने इलाके के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं कृषि अधिकारियों ने किसानों को फसल के बचाव के लिए एक प्रतिशत बावस्टीन दवा का घोल बनाकर सरसों की फसल पर छिड़काव करने की सलाह दी है। कृषि अधिकारी विनोद सांगवान ने बताया कि लोहारू खंड में करीब 48 हजार एकड़ में सरसों, 30 हजार एकड़ में गेंहू, करीब 1500 एकड़ में जौ और करीब 200 एकड़ में चने की फसल की बिजाई की गई है।
उन्होंने बताया कि लोहारू खंड में सरसों की फसल में मरगोजा और सफेद रतवा का असर इतना अधिक नहीं है, कहीं-कहीं इसका असर अधिक हो सकता है। हालांकि जिले की बात करें तो सिवानी, बहल आदि इलाके में इसकी मात्रा अधिक हो सकती है। मौसम खराब होने से व नमी अधिक होने से सफेद रतवा का रोग सरसों की पछेती फसल को प्रभावित कर रहा है। इसमें सरसों के पौधे की पत्तियां और फूल पर सफेद दाग हो जाते हैं। जो फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस रोग से बचाने के लिए फसल के पहले पानी के बाद 15-15 दिन के अंतराल पर बावस्टीन दवा का छिड़काव किया जाना चाहिए।
गेहूं की फसल में पीलेपन को दूर करने के लिए मिश्रण का करें छिड़काव
कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण गेहूं की फसल में कहीं-कहीं पीलापन दिखाई दे रहा है। ऐसे में किसानों को चाहिए कि वे गेहूं की फसल में 21 प्रतिशत वाली आधा किलोग्राम जिंक व अढाई किलोग्राम यूरिया 150 लीटर पानी में छिड़काव कर प्रभावित फसल पर स्प्रे करें। इससे गेंहू की फसल का पीलापन दूर हो जाएगा।