भिवानी। जिला मुख्यालय की मंडी में बाजरा लेकर आने वाले किसानों को अब वाहन की जीओ टैगिंग, फोटो और बायोमेट्रिक के बाद ही गेट पास मिलेगा। वहीं बाजरे की सरकारी खरीद होगी या किसानों को भावांतर का लाभ मिलेगा इस पर अगले सप्ताह तक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
सरकार ने बाजरे का एमएसपी 2900 रुपये घोषित किया है लेकिन सरकारी खरीद को लेकर अभी नीति जारी नहीं हुई है। पिछले साल किसानों को भावांतर का लाभ मिला था जबकि उससे पिछले सीजन में हैफेड और एचडब्ल्यूसी ने बाजरा खरीदा था। उस दौरान 67 हजार मीट्रिक टन बाजरा खरीदा गया था। इस बार 80 हजार मीट्रिक टन से अधिक बाजरा खरीद की संभावना जताई जा रही है।
इसके मद्देनजर हैफेड और एचडब्ल्यूसी के पास करीब 13 लाख जूट बारदाना का अग्रिम भंडारण है। सरकार की ओर से एक अक्तूबर से बाजरे की खरीद शुरू करने का दावा किया जा रहा है लेकिन खरीद की नीति अभी नहीं आई है। नीति जारी होने के बाद ही खरीद वाली मंडियां तय होंगी और सरकारी एजेंसियों की ओर से बाजरा खरीद की प्रक्रिया शुरू होगी।
जिला मुख्यालय की मंडी में हालांकि खरीद को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। खरीफ सीजन में पहली बार बाजरा खरीद के दौरान गेट पास के लिए जीओ टैगिंग और बायोमेट्रिक की व्यवस्था लागू की गई है। अब तक यह व्यवस्था केवल रबी सीजन में लागू थी। इसके तहत मंडी के गेट पर हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड ने किसान केंद्र स्थापित किया है। यहां फसल लेकर आने वाले वाहन की जीओ टैगिंग के साथ फोटो ली जाएगी और किसान की बायोमेट्रिक कराई जाएगी। इसके बाद पोर्टल पर दर्ज फसल के अनुसार गेट पास जारी होगा।
प्रक्रिया पूरी कराने के लिए मार्केटिंग बोर्ड ने कॉमन सर्विस सेंटरों से अस्थायी तौर पर कुछ कर्मचारी भी हायर किए हैं। इन कर्मचारियों की मदद से किसानों की जीओ टैगिंग, फोटो और बायोमेट्रिक की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार खरीफ फसल खरीद सीजन में यह व्यवस्था मंडी में खरीद प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए लागू की गई है।
मंडी शेड में पड़ा है आढ़तियों का सामान
मंडी में तीन मुख्य शेड हैं लेकिन अभी इनके नीचे किसानों की कपास और आढ़तियों का सामान पड़ा है। बाजरे की आवक शुरू होने के साथ ही मार्केटिंग बोर्ड अधिकारियों ने संबंधित आढ़तियों को शेड खाली करने के निर्देश दिए हैं। ताकि मंडी में आने वाले किसानों के बाजरे को शेड के नीचे उतारा जा सके।
आवक बढ़ने पर मंडी में ज्यादातर बाजरा खुले प्लेटफार्म पर ही पड़ा रहता है। शेड खाली होने से किसानों को फसल उतारने के लिए जगह मिल सकेगी। अधिकारियों ने संबंधित आढ़तियों को सामान हटाने के निर्देश दिए हैं।
भावांतर के भंवर में किसान, सरकार नहीं ले रही संज्ञान : भूरु
जिला मुख्यालय की मंडी में अब तक करीब साढ़े सात हजार क्विंटल से अधिक बाजरे की ढेरियां लग चुकी हैं। इसके बावजूद किसान भावांतर के भंवर में फंसे हैं और सरकार अब तक यह तय नहीं कर पाई है कि फसल की सरकारी एजेंसी खरीद करेगी या भावांतर का लाभ दिया जाएगा। प्राइवेट बोली का गेट पास कटाने पर किसान को भावांतर का लाभ नहीं मिलेगा और न ही सरकारी खरीद का लाभ मिल सकेगा। - नरेश कुमार भूरु, प्रधान, दी ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन, भिवानी
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बाजरे की सरकारी खरीद होनी है या फिर भावांतर मिलना है इसको लेकर अगले सप्ताह तक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल बाजरा खरीद को लेकर सरकार की पॉलिसी नहीं आई है। पॉलिसी आने पर ही मंडियां भी निर्धारित होंगी और बाजरे की खरीद की प्रक्रिया भी आरंभ हो जाएगी। फिलहाल एजेंसी के पास पर्याप्त मात्रा में बारदाना मौजूद है। - पुनीत पंघाल, जिला प्रबंधक, हैफेड, भिवानी
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जिला मुख्यालय की मंडी में किसानों के बाजरा खरीद के सभी बंदोबस्त किए जा चुके हैं। किसानों के गेट पास के लिए फसल लाने वाले वाहन की जीओ टैगिंग से फोटो होगी और संबंधित किसान की बायोमेट्रिक कराई जाएगी। इसके बाद पोर्टल पर दर्ज फसल के हिसाब से गेट पास दिया जाएगा। इस काम के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है। खरीफ फसल खरीद सीजन में यह नई व्यवस्था मार्केटिंग बोर्ड की तरफ से की गई है।
- संदीप लोहान, कार्यकारी अधिकारी एवं सचिव, हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड, भिवानी