शहीद की देह से लिपट कर बिलख पड़ीं मां और पत्नी
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी/चांग।
भारत माता की जय..., शहीद गजेंद्र सिंह अमर रहे... जैसे नारों के बीच शुक्रवार को बीएसएफ में असिस्टेंट कमांडेंट शहीद गजेंद्र सिंह को हजारों लोगों ने अंतिम विदाई दी। सात माह की बेटियों से जब पिता के चरण स्पर्श कराए तो सबकी आंखें नम हो गईं। विधायक ने शहीद की अर्थी को कंधा दिया। पूरे राजकीय सम्मान के साथ शहीद की अंत्येष्टि की गई।
शुक्रवार सुबह शहीद गजेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव खरक कलां पहुंचा। शहीद की शहादत को नमन करने के लिए हजारों लोग गांव पहुंचे और भारत माता की जय व शहीद गजेंद्र अमर रहे ... के नारे लगाते रहे। शहीद के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शनों व रस्म क्रिया के लिए कुछ देर के लिए उनके घर पर रखा गया। घर पहुंचते ही मां-पत्नी व परिजन पार्थिव शरीर से लिपट कर बिलख पड़े। बुजुर्गों ने बड़ी मुश्किल से परिजनों को ढांढस बंधाया।
हाथों में तिरंगा थामे युवा व बच्चों ने गजेंद्र सिंह अमर रहे के नारों के बीच शहीद की अंतिम यात्रा शुरू हुई। विधायक बिशंबर वाल्मीकि ने शहीद की अर्थी को कंधा दिया। अंतिम यात्रा में इस कदर हुजूम उमड़ा कि गांव की गलियों में पांव रखने के लिए जगह नहीं बची। महिलाओं ने अपने घरों की छत पर खड़े होकर अपने जांबाज जवान को अंतिम विदाई दी। खरक बस स्टैंड पहुंचने पर स्कूली छात्राओं ने मानव श्रृंखला बनाकर शहादत को सलाम किया।
बाद में प्रशासन की तरफ से एसडीएम सतीश कुमार समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने शहीद को श्रद्धांजलि दी। उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया है। शहीद के भतीजे ने चिता को मुखाग्रि दी।
उधर, शहीद गजेन्द्र का शव खरक पहुंचते ही शोक स्वरुप खरक कलां व खरक खुर्द के बाजार व बस स्टैंड मार्केट बंद रही। गत सात मार्च की शाम को छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के हमले गजेंद्र सिंह शहीद हो गए थे।
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बेटियों से कराए चरण स्पर्श
शहीद गजेन्द्र की चिता को मुखाग्नी उनके दोनों भाइयों व एक भतीजे ने दी। इससे पहले गजेंद्र की 7 माह की दो जुड़वां बेटी वंशिका व वर्तिका से पिता के चरण स्पर्श कराए गए तो हर आंख नम हो गई। गजेंद्र को शादी के 14 साल बाद पिछले साल अगस्त में ही दो बेटियां हुई थीं।
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जाने का गम, लेकिन शहादत पर गर्व : पवन
गजेंद्र से बिछुड़ने का परिजनों व ग्रामीणों को दुख है, लेकिन देश के लिए जान देने पर उन्हें दुख से ज्यादा गर्व भी है। शहीद के भाई पवन का कहना है कि भाई के जाने का इतना दुख है कि वे बयां नहीं कर सकते। गजेंद्र सिंह की बहादुरी पर उन्हें नाज है। ग्रामीण जगदीश ने बताया कि उन्हें अपने साथी गजेन्द्र की शहादत पर गर्व है। उन्होंने कहा कि देश के लिए जान देने का गर्व बहुत कम लोगों को मिलता है।
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गजेन्द्र की पत्नी हुई बेहोश
गजेन्द्र का शव घर पहुंचते ही सबसे पहले उनकी मां को गजेंद्र के अंतिम दर्शन कराए गए। इसके बाद शहीद की पत्नी को अंतिम दर्शन के लिए लाया गया। शहीद को देखते ही गजेंद्र की पत्नी मोनिका बेहोश हो गईं।
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आश्रितों को 50 लाख व नौकरी की करेंगे मांग : विधायक
विधायक बिशंभर ने कहा कि सरकार की तरफ से शहीद के आश्रितों को 50 लाख रुपये व एक सरकारी नौकरी दी जाएगी। गांव खरक में शहीद गजेंद्र सिंह के नाम पर कम्यूनिटी सेंटर का निर्माण करवाया जाएगा। गजेन्द्र सिंह के पिता मोतीराम सहित उनके पविार के अधिकतर सदस्य सेना में भर्ती होकर देश की सेवा कर चुके हैं या कर रहे हैं।
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ये रहे मौजूद
जिला प्रशासन की तरफ से एसडीएम सतीश कुमार, नायब तहसीलदार नरेश कुमार इसके आलावा विधायक बिंशबर वाल्मीकि, सुनील लांबा, मनमोहन भुरटाना, मीना परमार, डा. बृजपाल पप्पू, विकास बड़सी, चेयरमैन नरेन्द्र शर्मा, जगदीश मिताथल, रामकिशन फौजी, सुरेन्द्र परमार, टीनू आजाद, बिट्टू शर्मा, विरेन्द्र खरकिया, जितेन्द्र शर्मा, आजाद बाल्मीकि, कमल फौजी, वीरपाल खरकिया, सेठी धनाना, काला नंबरदार, दलेल सरपंच, सरपंच अनिल परमार, सरपंच राजेश, सरपंच विकास, पूर्व सीपीएस रामकिशन फौजी के निजी सचिव संजय शर्मा, संदीप खरकिया, अन्नू परमार, बिट्टू परमार, सोनू पंच, डा. हंशू परमार, रोहित दहिया, मांगेराम, ईश्वर , अनिल शर्मा सहित भारी संख्या में लोगों ने शहीद को श्रदाजंलि अर्पित की।