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प्रधानमंत्री आवास योजना: रजिस्ट्री के फेर में 3800 में से 3100 फार्म रिजेक्ट

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अमर उजाला ब्यूरो
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भिवानी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन करने वाले पात्र लोगों के 3800 में से 3100 फार्म रजिस्ट्री और नक्शे के फेर में रिजेक्ट हो गए हैं। पात्र होते हुए भी इन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। दरअसल अधिकतर पात्र परिवार पुराने शहर में हैं जो नगर परिषद के तहत लाल डोरे में आता है। लाल डोरे में आने वाली जगह का खसरा नंबर, किला नंबर, खेवट का नंबर नहीं होता। जिनके पास वर्षों से मकान है तो इनकी रजिस्ट्री भी नहीं है जबकि प्रधानमंत्री आवास योजना में नक्शा अनिवार्य कर दिया गया है। इस शर्त के कारण जब पात्र नक्शा बनवाने जा रहे हैं तो उनसे रजिस्ट्री, इंतकाल, जमाबंदी की मांग की जा रही है। ऐसे में आवदेक परेशान हैं और पात्र होने के बावजूद वे मकान नहीं बना पाएंगे।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जुलाई में आवेदन प्रक्रिया शुरू हुई थी। सर्वे भी किया गया था। जिसके तहत 3800 पात्र पाए गए थे और इनके आवेदन फार्म जमा करते हुए इनके कागजात मांगे गए थे। अब स्कीम के तहत नक्शा होना अनिवार्य है। नक्शा बनवाने की प्रक्रिया ऑनलाइन है। जिसके तहत आर्किटेक्ट के माध्यम से ही आवेदन करना होगा और आवेदन में सबसे पहले यहीं पूछा जा रहा है कि रजिस्ट्री है या नहीं। आवेदन करने वाले अधिकार के पास रजिस्ट्री नहीं है।
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ये है मुख्य समस्या
मुख्य समस्या रजिस्ट्री, इंतकाल, जमाबंदी की है। पुराना शहर लाल डोरे के तहत आता है और यहां जमीन का न खसरा नंबर होता है और न ही किला नंबर। अधिकतर मकान पुराने होने के कारण लोगों ने रजिस्ट्री की भी आवश्यकता नहीं समझी। जिन लोगों ने मकान बेचे, केवल उन्हीं मकानों की रजिस्ट्री बनी है।

दादा के नाम मकान, नहीं हुआ बंटवारा
कागजात पूरे नहीं होने के फेर में फंसे अधिकतर परिवार ऐसे हैं, जिनके मकान या जगह अभी भी दादा-परदादा के नाम चल रही है और उनके दादा-परदादा यहां तक कि पिता का भी निधन हो चुका है। ऐसे में उनके समक्ष समस्या खड़ी हो गई है। नप कार्यालय में पहुंचते है तो जवाब मिलता है कि पहले रजिस्ट्री अपने नाम कराओ। रजिस्ट्री कराने के लिए उन्हें जमीन के अब तक के सभी वारिसों के हस्ताक्षर कराने होंगे।

700 में से जमा हुए सिर्फ 15 के नक्शे
आवेदन करने वाले सात सौ पात्र लोगों में से महज 15 ने ही नक्शे बनवाकर डीसी कार्यालय में डीलिंग हेड के पास जमा कराये हैं। जिनकी फाइलें मुख्यालय भेजी गई है। बाकी करीब 685 ने नक्शे की प्रक्रिया ही पूरी नहीं की है।

क्या कहते हैं पीड़ित
पिता के नाम मकान है, अब नक्शा नहीं बन रहा
मकान मेरे पिता के नाम है मगर अब आवेदन किया तो नक्शा मांग रहे हैं। नक्शे के लिए आवेदन किया तो जमीन की रजिस्ट्री मांग रहे हैं। उनका मकान पुस्तैनी है, वे रजिस्ट्री कहां से लाए।
राज कपूर, आवेदक

नक्शा नहीं बना
सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना में नक्शे की मांग की है और उसके लिए रजिस्ट्री, नई असेस्मेंट, इंतकाल आदि कागजात मांग रखे है। मकान उसके दादा के नाम है। पुराना पुस्तैनी मकान है।
राम सिंह, पात्र

कहां से लाए अब रजिस्ट्री और नक्शा
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन किया था मगर अब रजिस्ट्री और नक्शे की शर्त लगाई जा रही है। इन्हें पूरी करना महाभारत बन गया है।
सुनील कुमार, पात्र

दादा है नहीं, जमीन उनके नाम
आवेदन करने वालों में अधिकतर पात्रों की जमीन दादा-पड़दादा के नाम है। वे अब नहीं। बटवारा भाइचारे में किया हुआ है। ऐसे में अब वे कहां से सारे कागजात बनवाए।
शेर सिंह, पात्र

ये हो सकता है समाधान
विशेषज्ञों की माने तो लाल डोरे के तहत आने वाले मकानों के लिए अलग व्यवस्था की जानी चाहिए। उनकी तसदीक पटवारी से करवाई जाए और उनसे तीन साल की टैक्स भरने की रसीद ली जाए। जिससे साबित होगा कि उनके पास मकान का मालिकाना हक है। इसके आधार पर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सहायता राशि दी जा सकती है।
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प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नक्शा अनिवार्य है और नक्शे के लिए रजिस्ट्री। कई पात्र लोगों के पास रजिस्ट्री नहीं है क्योंकि उनके पुस्तैनी मकान हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया है तो कागजात तो सारे पूरे करने होंगे। लोग अपनी रजिस्ट्री करवाकर नक्शा बनवाएं।
दलबीर सिंह, बिल्डिंग इंस्पेक्टर
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