भिवानी। ग्वार की फसल में उखेड़ा रोग से लगभग 15 से 30 प्रतिशत पौधे सूख जाते हैं। इससे किसानों को काफी हानि उठानी पड़ती है। अधिकतर किसानों को यह जानकारी नहीं है कि उखेड़ा रोग की फंगस जमीन में ही रहती है, जो केवल भूमि में फफूंद नाशक दवा डालने से अथवा बीज उपचार से ही काबू में रखी जा सकती है।
यह बात एचएयू हिसार के कीट विज्ञान विभाग से सेवानिवृत्त डॉ. आरके सैनी ने खंड सिवानी के गांव झुप्पाकलां में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा आयोजित कृषि शिविर को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि कि किसान इसकी रोकथाम के लिए दवा का स्प्रे करते हैं, परंतु इसके वांछित परिणाम नहीं मिलते। ऐसे में मात्र 20 रुपये के खर्च से अगर बीज को कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत नामक फफूंद नाशी से बीज उपचारित करके बोएं तो इस रोग की 10 प्रतिशत रोकथाम हो जाती है।
उन्होंने किसानों को ग्वार की शिविर में किसानों को उन्नत किस्मों जैसे एचजी 365, एचजी 563 तथा एचजी 2-20 से बिजाई करने की सलाह दी तथा प्रति एकड़ 25 किलो डीएपी को ड्रिल करने को कहा। कृषि विभाग से पहुंचे विषय विशेषज्ञ डॉ. शमशेर सिंह जांगड़ा ने नरमा, बाजरा, मूंग, मूंगफली आदि खरीफ फसलों का भरपूर उत्पादन लेने के लिए जरूरी टिप्स किसानों को दिए।
उन्होंने बताया कि मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर किसान अपनी फसल का पंजीकरण अब भी करवा सकते हैं। शिविर में खार के उखेड़ा रोग की रोकथाम के लिए दवा के नमूने व साहित्य बांटे गए तथा किसानों द्वारा पूछे गए विभिन्न सवालों के उत्तर दिए गाए। इस अवसर पर सरपंच प्रतिनिधि राजेंद्र सिंह के अलावा नंबरदार रविंद्र कुमार, सुशील, राजकुमार, मोहित कुमार, दर्शन कुमार, बिरजू, रोशन, रामकरण, अंकित कुमार, ताराचंद, सुरेंद्र, रामकिशन, राजेश, सुनील सहित 70 किसान उपस्थित रहे।