विश्व भर में सबसे बड़े सिर वाले बच्चों में शुमार रह चुकी बेबी रूना इलाज की अगली प्रक्रिया के लिए फोर्टिस हॉस्पिटल लौट आई है। अगर रूना इलाज की आगामी प्रक्रिया के लिए स्वस्थ पाई गई तो तुरंत ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। हालांकि पूरी तरह से ठीक होने में बेबी रूना को पांच से छह साल का समय लग सकता है।
त्रिपुरा निवासी रूना को 16 अप्रैल, 2013 को इलाज के लिए फोर्टिस हॉस्पिटल में दाखिल कराया गया था। रूना का सिर अन्य बच्चों की तुलना में दोगुने से भी बड़ा था। रूना हाईड्रोसिफेलसर बीमारी से पीड़ित थी।
इसमें सिर के भीतर बनने वाला तरल अवशोषित नहीं हो पाता, जिससे सिर का आकार बढ़ता जाता है। रूना को यह बीमारी जन्मजात थी। उसके इलाज के लिए न्यूरोलॉजिस्ट, साइकलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट और ओपथोमोलॉजिस्ट विशेषज्ञों को लेकर विशेष टीम गठित की गई थी।
न्यूरो सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. संदीप वैश्य बताते हैं कि इलाज की प्रथम प्रक्रिया 15 मई को शुरू की गई थी। इस प्रक्रिया के तहत एक्सट्रा वेंटिकूलर ड्रेन से उसके मस्तिष्क का तरल पदार्थ निकाला गया था। यह प्रक्रिया तीन सप्ताह में एक बार की गई।
इसके सफल रहने पर एक सर्जरी से शंट डाला गया, जोकि तरल को तेजी से निकालता है। इसके साथ ही 11 जुलाई तक खोपड़ी की हड्डियों की दोबारा से संरचना भी की गई।
रूना का सिर लगभग सामान्य स्थिति में पहुंचने पर 31 अगस्त को उसे छुट्टी दे दी गई थी। करीब साढ़े तीन माह बाद अब रूना वापस आई है, ताकि इलाज की अगली प्रक्रिया के लिए जांच की जा सके।
सारी प्रक्रियाएं दोहराई जाएंगी
डॉ. संदीप का कहना है कि अभी तक का इलाज रूना को उसकी बीमारी से लड़ने के काबिल बनाने और सामान्य शारीरिक विकास में मदद करने के लिए था। इलाज की अगली प्रक्रिया में दोबारा से सारी प्रक्रियाएं दोहराई जाएंगी। बेबी रूना की जांच शुरू कर दी गई है। अगर वह इलाज के लिए सक्षम पाई गई तो शीघ्र ही आगामी प्रक्रियाओं पर काम शुरू हो जाएगा।