हरियाणा के चर्चित IAS अधिकारी अशोक खेमका का एक बार फिर तबादला कर दिया गया है। आप जानकर हैरान होंगे कि हरियाणा कैडर के 1991 बैच के आईएस अधिकारी रहे खेमका का 21 साल के कार्यकाल में 44 वीं बार तबादला किया गया है।
अशोक खेमका को इस बार 6 महीने में अपने पद से हटना पड़ा है। वह अभी हरियाणा बीज विकास निगम के एमडी थे लेकिन अब उन्हें यहां से हटाकर हरियाणा अभिलेखागार विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है।
आपको बता दें की IAS अधिकारी अशोक खेमका ने तक़रीबन 6 महीने पहले रोबर्ट वाड्रा जमीन घोटाले का पर्दाफाश किया था जिसके बाद ही खेमका सुर्ख़ियों में आये और आशंका थी कि उनपर एक बार फिर तबादले की गाज गिर सकती है और वहीं हुआ भी। उनका तबादला बीज निगम में किया गया, जहां जूनियर अफसरों को भेजा जाता है।
अब करीब छह माह बाद उनका वहां से भी तबादला कर दिया गया है।
उनकी पहली पोस्टिंग सन 1993 में हुई थी। उनके पूरे कार्यकाल में उनकी अधिकतर पोस्टिंग कुछ महीने ही चलीं। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग विभागों में 8 पोस्ट ऐसी संभालीं, जोकि महीने भर या उससे भी कम समय के लिए थीं।
संयोग से, उनकी 44 में से 12 पोस्टिंग ऐसे विभागों में हुई जहां उन्हें जमीनी कामकाज में डील करना था। जहां भूमि के अधिग्रहण से लेकर उसके रेकॉर्ड, रेवेन्यू और विकास तक की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर थी।
मिनिस्ट्री ऑफ पर्सनल की एग्जेक्युटिव रेकॉर्ड शीट (ईआरएस) में दर्ज जानकारी के मुताबिक, खेमका ने केवल दो ही ऐसी पोस्टिंग संभाली हैं जो एक साल से ज्यादा समय तक रही हों।
2005-06 में यह उनका पहला कार्यकाल था जब उन्होंने शहरी विकास विभाग में बतौर मुख्य प्रबंधक डेढ़ साल के लिए काम किया। खेमका ने उद्योग विभाग में 2008 से 2010 के बीच, यानी एक साल 10 महीने तक प्रबंध निदेशक के तौर पर काम किया।
खेमका कह चुके हैं,' सरकार किसी भी पार्टी की रही हो, मुझे हर बार अपनी ईमानदारी की सजा भुगतनी पड़ी क्योंकि मैं लगातार घपलों और घोटालों का पर्दाफाश करता रहा हूं।'
मुख्यमंत्री तक का आदेश नहीं माना था
अपनी ईमानदारी और भ्रष्टाचार विरोधी तेवर की वजह से ही अशोक खेमका हरियाणा में काफी लोकप्रिय हैं।
साल 2004 में उन्होंने मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला तक का आदेश मानने से इंकार कर दिया था, जब सरकार ने कई शिक्षकों का सत्र के बीच में ही तबादला किया था।