हरियाणा के जिला रोहतक शहर में आशा वर्करों ने अपनी मांगों के लिए शनिवार को प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम सीटीएम को ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
छोटूराम चौक पर धरने के कारण तीन घ्ंाटे तक जाम की स्थिति बनी रही। पुलिस ने वाहनों को दूसरे रास्ते से निकाले।
आशा वर्कर, सीटू, किसान सभा और अन्य संगठनों के सदस्य छोटूराम पार्क में एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते धरने पर बैठ गए।
जनवादी महिला समिति की राज्य सह-सचिव सविता ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत हरियाणा में 17000 महिला आशा वर्कर्स कार्यरत हैं।
इनके लिए कोई भी मासिक वेतन अथवा भत्ता निर्धारित नहीं है। इनको मामूली प्रोत्साहन राशि ही मिलती रही है, उसमें भी इस वित्तीय वर्ष में हरियाणा सरकार द्वारा कटौती कर दी गई।
उन्होंने कहा कि 10 नवंबर को गोहाना रैली में भी मुख्यमंत्री ने जो घोषणाएं की, उनमें भी आशा वर्कर्स को नजरअंदाज कर दिया गया।
इस उपेक्षा के खिलाफ 30 नवंबर को 10,000 आशा वर्करों ने रोहतक में रैली की। इसके बाद प्रशासन की ओर से एक दिसम्बर को मुख्यमंत्री के साथ वार्ता का लिखित निमंत्रण पत्र दिया गया, परंतु एक दिसंबर को मुख्यमंत्री के साथ बातचीत विफल रही।
उन्होंने कहा कि सारा दिन मेहनत करने के बावजूद महीने में 500-700 रुपये तक मिलते हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग में सबसे निचले पायदान पर बुनियादी काम कर रही हैं। उन्हें न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी मिले।
इसके बाद आशा वर्कर और अन्य संगठनों के सदस्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते जिला उपायुक्त के कैंप कार्यालय पहुंचे और सीटीएम जयदीप सिंह को राष्ट्रपति और राजपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करने वालों में पार्वती, एसएफआई के जिला के नेता गौरव, आशा वर्कर्स यूनियन की नेता अनिता, किसान सभा के जिला सचिव बलवान सिंह शामिल रहे।