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रोहिणी नक्षत्र में होगा पूजन, करवाचौथ पर शुभ योग

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करवा चौथ का पर्व इस बार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, 24 अक्तूबर, रविवार को मनाया जाएगा। खास बात यह है कि पांच साल बाद करवा चौथ पर शुभ योग बन रहा है। इस बार रोहिणी नक्षत्र में पूजन होगा। वहीं रविवार होने की वजह से चंद्र देव के साथ सूर्यदेव का भी व्रती महिलाओं को आशीर्वाद मिलेगा। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि रविवार सुबह 3 बजकर 1 मिनट पर शुरू होगी, जो अगले दिन 25 अक्तूबर को सुबह 5 बजकर 43 मिनट तक रहेगी।
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ज्योतिषी गिरीश आहूजा ने बताया कि करवा पूजन का शुभ मुहूर्त 24 अक्तूबर को शाम 5.43 बजे से लेकर 6.59 तक होगा। इस दिन शाम को 4 बजकर 18 मिनट से शाम 5 बजकर 43 मिनट तक राहु काल रहेगा। राहु काल में कोई भी पूजा व शुभ मंगल कार्य नहीं करना चाहिए। इस दिन अंबाला में चंद्रमा रात 8 बजकर 8 मिनट पर उदय होगा
दूसरी ओर त्योहार को लेकर बाजार गुलजार हो गए हैं। महिलाएं जमकर खरीदारी करने में जुटी हैं। महिलाएं चूड़ियां, श्रृंगार का सामान और नए वस्त्र खरीद रही हैं। कोरोना काल के बाद यह पहला करवा चौथ है, जिसको लेकर दुकानदार भी उत्साहित हैं।
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कई वर्षों के बाद बनेगा अद्भुत संयोग
चंद्रमा का गोचर वृषभ राशि में उच्च राशि का होना और रविवार के दिन रोहिणी नक्षत्र चंद्र के उच्च राशि में होने की वजह से व्रती महिलाओं को सूर्यदेव व चंद्र देव का असीम आशीर्वाद प्राप्त होगा। 24 अक्तूबर को करवा चौथ आना भी अंक शास्त्र में महत्वपूर्ण माना गया है। 24 के अंक को यूनिवर्सल नंबर माना गया है। 2 प्लस 4 यानी 6 होता है। इस अंक का स्वामी शुक्र है। छह का अंक वैवाहिक जीवन, प्रेम सौंदर्य वैभव व लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। 24 का अंक लाभ और सफलता देने वाला माना गया है। ऐसे में 24 अक्तूबर को रविवार, रोहिणी नक्षत्र, चंद्र का उच्च राशि में होना, 6 के अंक का शुक्र में होना, इस बार करवा चौथ पर एक अद्भुत संयोग बना रहे हैं।
सास-बहू का रिश्ता होता है मजबूत
करवा चौथ का व्रत सिर्फ पति-पत्नी के प्यार का त्योहार न होकर, सास-बहू के रिश्ते को भी मजबूत करता है। इस दिन सास अपनी बहू को सरगी के रूप में ढेर सारे उपहार और आशीर्वाद देती है। करवा चौथ के दिन मां पार्वती, भगवान शिव, कार्तिकेय और श्री गणेश सहित शिव परिवार का पूजन किया जाता है। इस दिन महिलाएं 16 श्रृंगार करके चौथ माता की पूजा करती हैं। मां पार्वती से सुहागिनें अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। इस दिन करवे में जल भरकर कथा सुनी जाती है। महिलाएं सुबह सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं। रात के समय चंद्रोदय के बाद चांद के दर्शन करके उसकी पूजा की जाती है। चांद को अर्घ्य देकर पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है।
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