पंचांग के अनुसार दिवाली का त्योहार हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। अंधकार पर प्रकाश की विजय वाले इस पर्व पर मां लक्ष्मी, श्रीगणेश, मां सरस्वती एवं कुबेर की पूजा करने का विधान है। ज्योतिषी गिरीश आहूजा ने बताया कि दिवाली का पर्व धनतेरस से शुरू होता है और भैया दूज के दिन खत्म होता है। इस वर्ष 4 नवंबर गुरुवार को दिवाली का पर्व मनाया जाएगा। अमावस्या तिथि 4 नवंबर को सुबह 6.03 बजे से आरंभ होगी जो 5 नवंबर को रात्रि 2.44 मिनट पर समाप्त होगी। दीपावली पर स्वाति नक्षत्र आयुष्मान योग एवं शुभ ग्रह नक्षत्रों से अद्भुत संयोग बन रहा है।
दिवाली का समय किसी भी कार्य के शुभारंभ और किसी वस्तु की खरीदी के लिए बेहद शुभ माना जाता है। दीपावली के आसपास सूर्य और चंद्रमा तुला राशि में स्वाति नक्षत्र में स्थित होते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य और चंद्रमा की यह स्थिति शुभ और उत्तम फल देने वाली होती है। तुला एक संतुलित भाव रखने वाली राशि है। यह राशि न्याय और अपक्षपात का प्रतिनिधित्व करती है। इन गुणों की वजह से सूर्य और चंद्रमा दोनों का तुला राशि में स्थित होना एक सुखद व शुभ संयोग होता है। इसी साल दिवाली पर तुला राशि में चार ग्रहों की युति बनेगी। सूर्य, बुध, मंगल व चंद्र तुला राशि में रहेंगे और गुरु व शनि मकर राशि में एक साथ होंगे।
सूर्य बुध का राज आदित्य योग व चंद्र मंगल का लक्ष्मी योग बन रहा है। यह चतुग्रही शुभ योग सूर्योदय के साथ ही शुरू हो जाएगा जो रात भर रहेगा। इस वजह से इस वर्ष की दिवाली अत्यंत शुभ फलदायक रहेगी। इन योग में वाहन लेने उद्योग, दुकानदारी, शृंगार प्रसाधन एवं अन्य कर्म के खरीदारी के लिए अच्छा माना जाता है।
माता लक्ष्मी के साथ गणेश की पूजा का महत्व
दिवाली की रात माता लक्ष्मी और गणेश की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार गणपति भगवान को ऋद्धि-सिद्धि के अधिपति और मां लक्ष्मी को धन-संपत्ति की देवी कहा जाता है। ज्योतिषी ने बताया कि इसलिए प्रत्येक व्यक्ति दिवाली के दिन इनकी स्थापना ऐसे मुहूर्त में करना चाहता है, जिसकी वजह से भगवती लक्ष्मी उनके यहां वास करने लग जाए। यदि किसी व्यक्ति को माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन की प्राप्ति हो जाए, लेकिन उसमें बुद्धि ही न हो तो वह धन उसके किसी भी काम का नहीं रहता। इसलिए धन के साथ बुद्धि भी अति आवश्यक है। माता लक्ष्मी उसी के पास टिकती हैं, जिसके पास बुद्धि होती है। गणेश भगवान को बुद्धि और सिद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए कहा जाता है कि मां लक्ष्मी के घर आने के बाद अगर बुद्धि का उपयोग नहीं किया जाए तो लक्ष्मी जी को रोक पाना मुश्किल हो जाता है। दिवाली की शाम को मां लक्ष्मी के साथ-साथ गणेश जी की प्रतिमा रखकर दोनों की एक साथ में पूजा की जाती है और धन, बुद्धि यश की कामना की जाती है।
दीवाली लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त
चार नवंबर को सुबह छह बजकर तीन मिनट से अमावस्या तिथि आरंभ होगी और पांच नवंबर 2021 को रात्रि दो बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.44 बजे से दोपहर 12.28 बजे तक, राहुकाल दोपहर 1.28 बजे से दोपहर 2.49 बजे तक, प्रीति योग सुबह 11.09 बजे तक, आयुष्मान योग सुबह 11.10 बजे से अगले दिन सुबह तक, प्रदोष काल शाम 5.33 बजे से रात 8.12 बजे तक होगा। वहीं अति शुभ मुहूर्त शाम 6.11 बजे से रात 8.05 बजे तक स्थिर वृषभ लग्न व अमृत की चौघड़िया का योग रहेगा। निशीथ काल रात 8.12 बजे से 10.51 बजे तक रहेगा। शाम 7.11 बजे से रात 8.50 बजे तक चर की शुभ चौघड़िया रहेगी व मिथुन लग्न होगा। रात 8.50 बजे के बाद रोग एवं काल की चौघड़िया पूजन आरंभ के लिए शुभ नहीं है। महानिशीथ काल रात 10.51 बजे से रात 1.31 तक होगा। काल की अशुभ चौघड़िया रात 12.11 बजे तक होगी। शुभ लग्न होगा रात 12.12 बजे से रात 1.51 बजे तक लाभ के चौघड़िया एवं सिंह लग्न रात 12.42 बजे से 3 बजे तक रहेगा।