अंबाला सिटी। प्राचीन ऐतिहासिक टिल्ला श्री गुरु गोरक्षनाथ मंदिर में सैकड़ों वर्षों से चली आ रही गद्दी रस्म में भारी संख्या में विभिन्न राज्यों के श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने मंदिर पहुंचकर गुरु पीर पारसनाथ महाराज का आशीर्वाद लिया। यह कार्यक्रम महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर तीन दिनों के लिए आयोजित गया। टिल्ले के अनुयायी नथ्था राम ने बताया कि कार्यक्रम में पीर पारसनाथ महाराज विशेष पोशाक धारण कर गद्दी पर विराजमान हुए। इस अवसर पर पीर पारसनाथ महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि टिल्ले का इतिहास सदियों पुराना है।
उन्होंने बताया कि गुरु गोरक्षनाथ जी महाराज भगवान शिव के अवतार हैं। इसलिए इस मंदिर का महत्व पूरे भारत में माना जाता है। पीर पारसनाथ ने कहा कि गुरु गोरक्षनाथ जी की कृपा से टिल्ले पर आने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामना संपूर्ण होती है। टिल्ले के अनुयायी नथ्था राम व योगेश कुमार ने बताया कि प्राचीन समय में यह टिल्ला पाकिस्तान के झेलम जिले में स्थित था। आजादी के बाद शहर की पुरानी अनाज मंडी में टिल्ले का नवनिर्माण किया गया। उसके बाद इसका विस्तार हुआ।
उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि पर आंखों के निशुल्क शिविर में लगभग 203 मरीजों का जांच की गई। टिल्ले के सदस्य राजेश कथूरिया ने बताया कि पीर पारसनाथ द्वारा शुगर की दवाई जड़ी-बूटियों के माध्यम से तैयार की जाती है। यह दवाई करीब 85 मरीजों में मुफ्त वितरित की गई। बुधवार को दोपहर तक महिलाओं द्वारा भजन संकीर्तन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। तीन दिवसीय महाशिवरात्रि का महोत्सव का समापन विशाल भंडारे के साथ किया गया।