प्राथमिक पाठशाला में पढ़ने वाले जरूरतमंद बच्चों की जिज्ञासा शांत कराने के लिए एक शिक्षक उन्हें राज्यपाल और राष्ट्रपति से मिलवाने पहुंचे। इससे पहले शिक्षक की ओर से इसके लिए नियमानुसार अनुमति ली गई। शिक्षक के इस प्रयास की राज्यपाल और राष्ट्रपति ने भी प्रशंसा की थी।
14 नवंबर 2017 को गरीब और दलित परिवारों के तीन बच्चों को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलवाने के लिए शिक्षक मनोज दिल्ली पहुंचे थे। इन बच्चों में शामिल एक लड़का और दो लड़कियों जब राष्ट्रपति से मिले तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इसमें छात्रा ने सवाल किया कि क्या मैं राष्ट्रपति बन सकती हूं, यह सुनकर सभी ने उसका उत्साहवर्धन किया। इससे पहले शिक्षक मनोज ने तीनों बच्चों को तत्कालीन राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी से भी मिलवाया था।
विदित हो कि मनोज पांच साल से डेलू माजरा में प्राथमिक पाठशाला में कार्यरत हैं। हाल ही में 15 अगस्त को उन्हें जिलास्तरीय कार्यक्रम में गृहमंत्री अनिल विज ने भी सम्मानित किया था। सरकारी स्कूल में पढ़ाने के अलावा बच्चों के व्यक्तित्व को निखारने के लिए वह अलग-अलग गतिविधियां भी अपने स्तर पर करवाते रहते हैं। 26 अगस्त 2018 को भी उन्होंने स्कूली बच्चों को उप राष्ट्रपति वेंकैयानायडू से मिलवाया था। यही नहीं उन्होंने प्राथमिक पाठशाला के बच्चों को एयरफोर्स स्टेशन घुमाकर और उन्हें एयर शो दिखाकर देशभक्ति के लिए प्रेरित करने का भी कार्य किया। हाल ही में रक्षाबंधन पर 24 अगस्त को एयरफोर्स के जवानों को स्कूल की पांच छात्राओं से राखी बंधवाई। इसके लिए एयरफोर्स के अधिकारियों ने उनका आभार व्यक्त किया।
जेबीटी शिक्षक मनोज ने एक घंटे में 46 ऑनलाइन सर्टिफिकेट हासिल कर इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी नाम दर्ज करवाया है। वर्तमान में वह अंबाला शहर मानव चौक के पास रहते हैं। शिक्षक मनोज ने कहा कि यदि हर शिक्षक अपने स्तर पर थोड़ा सा प्रयास करे तो सरकारी स्कूलों में पढ़ने आने वाले बच्चों का करियर बेहतर बनाया जा सकता है। शिक्षक मनोज सक्षम हरियाणा अभियान में स्टार शिक्षक रहे हैं। सभी ब्लॉक के विद्यार्थियों के लिए सक्षम हरियाणा के पेपर भी इन्होंने तैयार करने में सहयोग किया।
विद्यालय सिर्फ विद्या अर्जन के लिए नहीं होता बल्कि यहां देश के भविष्य का निर्माण किया जाता है। झाडू़ माजरा में कार्यरत शिक्षक प्रदीप कुमार ने इसे सार्थक करने का काम किया है। उन्होंने बच्चों को ज्ञान के साथ ही व्यक्तित्व विकास के लिए भी प्रेरित किया। साथ ही स्वयं की पहल से स्कूल को मुख्यमंत्री स्कूल सौंदर्यीकरण अवार्ड भी दिलाया।
झाडू़ माजरा मिडिल स्कूल में कार्यरत अध्यापक प्रदीप कुमार ने पहले अपने खर्च से सरकारी स्कूल की छत को साफ करवाया, फिर स्कूल में जन्मदिन पर पौधे लगवाए। दूसरे शिक्षकों को भी जोड़ा तो गांव की पंचायत भी मदद के लिए आगे आ गई। इसके बाद स्कूल का कायाकल्प होने लगा। स्कूल के हर कोने में पानी की टैब, हर जगह पौधे, टाइलें, वॉशबेसिन और आर्गेनिक खाद से किचन गॉर्डन तैयार कराया। इसके परिणाम स्वरूप 2017 में मुख्यमंत्री स्कूल सौंदर्यीकरण अवार्ड इस स्कूल को मिला। इससे पहले 2016 में भी प्रदीप कुमार के प्रयास से यह अवार्ड सबका मिडिल स्कूल को मिला था। 2015 में क्लॉस रेडीनेंस कार्यक्रम के तहत इसी स्कूल को गोल्ड मेडल भी प्रदीप ने दिलवाया था। राजकीय स्कूल में रहते हुए उन्होंने बच्चों को टाई लगाना और आईकार्ड गले में डालकर आने के लिए प्रेरित किया। इससे पहले सभी के आईकार्ड भी खुद बनवाए। 2019 में राज्यस्तरीय प्रथम सक्षम स्कूल अवार्ड भी मुख्यमंत्री के द्वारा इन्हें दिया गया।
धर्म और संप्रदाय से ऊपर उठकर दलित और मलिन बस्ती के बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने का कार्य कर रहीं है संस्कारशाला, जिसे छह साल पहले नारायणगढ़ रोड स्थित गायत्री चेतना केंद्र में राज गुप्ता ने शुरू किया था। उन्होंने बताया कि अब तक 200 से अधिक बच्चों को संस्कारशाला में निशुल्क शिक्षा देने का कार्य किया गया है।
केंद्र के आसपास दलित और मलिन बस्ती होने के कारण 2015 में राज गुप्ता ने संस्कारशाला की शुरुआत की थी। यहां रविवार को छोड़कर रोजाना शाम 4 से 6 बजे तक कक्षाएं लगानी शुरू की। खुद इंग्लिश भाषा का ज्ञान देती थीं जबकि बीए में पढ़ने वाली छात्राओं के माध्यम से अन्य विषयों का ज्ञान यहां आने वाले बच्चों का दिलाया। इतना ही नहीं बाद में यहां कंप्यूटर का ज्ञान भी इन्होंने बच्चों को देना शुरू किया। उन्होंने बताया कि गत वर्ष लगे कोरोना काल से पहले तक 200 से अधिक बच्चों को शिक्षित किया गया।
38 साल 2 महीने प्रदेशभर की विभिन्न आईटीआई में शिक्षा का ज्ञान दिया। अब अंबाला शहर न्यू मॉडल कॉलोनी में रहने वाले 85 वर्षीय ओपी शर्मा गरीब और जरूरतमंद लोगों के अलावा हर वर्ग के लोगों को निशुल्क इलाज मुहैया करवा रहे हैं। 85 वर्षीय ओपी शर्मा इन दिनों खुद भी कैंसर से ग्रस्त हैं, लेकिन दूसरों की सेवा का जज्बा आज भी इन्हें जीवित रखे हुए है।
1957 में बतौर सिविल अनुदेशक आईटीआई में सेवाएं शुरू की। 1995 में अंबाला शहर राजकीय आईटीआई से बतौर प्रिंसिपल सेवानिवृत्त हुए। इससे पहले वे फिरोजपुर, नरवाना, रोहतक, हिसार, टोहाना, अंबाला कैंट इत्यादि जगह फोरमैन, समूह अनुदेशक के पद पर भी कार्यरत रहे। इसी दौरान होम्योपैथी में उनका लगाव हो गया। अपने गुरु से होम्योपैथी के गुर लिए। शिक्षा के साथ अपने पास आने वाले लोगों को बीमारी होने पर दवा देने लगे। हाथ में इतना जस हो गया कि अंबाला शहर के माजरी और फिरोजपुर में डिस्पेंसरी भी चलाई। 2003 में अंबाला शहर में श्री गुरुग्रंथ साहिब सेवा सोयायटी ने इन्हें डिस्पेंसरी के लिए कमरा दे दिया। यहीं पर निशुल्क ओपीडी और दवा वितरण का काम किया। अब कोरोना काल के चलते इन्होंने ओपीडी तो बंद कर दी लेकिन फोन पर मरीज से उसकी पीड़ा के बारे में जानकर अभी उसे उपचार बता देते हैं।
मन में कुछ अलग कर दिखाने की ललक हो तो विपरीत परिस्थितियों में भी रास्ते मिल ही जाते हैं। अंबाला में बतौर सहायक परियोजना समन्वयक कार्यरत पूजा शर्मा इसकी मिसाल हैं।
पूजा शर्मा ने पांच साल तक माजरी सीसे स्कूल में बतौर अंग्रेजी लेक्चरर सेवाएं दी। इसके बाद डेढ़ साल पंजौला सीसे स्कूल में पढ़ाया। इसी दौरान उनकी पदोन्नति हो गई और वह एपीसी नियुक्त हो गईं। इससे पहले पंजौला स्कूल में रहते हुए उन्होंने स्कूल की काया बदल दी। लॉकडाउन में उन्हें स्कूल की कार्यकारी मुखिया बनाया गया था। लॉकडाउन के दौरान बच्चे नहीं आते थे, लेकिन अध्यापक स्कूल जाते थे। ऐसे में उन्होंने स्कूल की दीवारों पर पेंटिंग करने की ठानी। खुद ही पूरे स्कूल की दीवारों पर पेंटिंग कर स्कूल की काया बदल डाली। इसके लिए उन्हें एसडीएम ने सम्मानित भी किया। पिछले करीब दो माह से पदोन्नति के बावजूद वह पंजौला स्कूल के विद्यार्थियों को निशुल्क ऑनलाइन शिक्षा दे रही हैं। अपने कार्यकाल के दौरान इनकी कक्षा का परिणाम 85 से 100 प्रतिशत तक रहा। लॉकडाउन के दौरान घर के पास रहने वाले बच्चों को अपने घर बुलाकर उन्हें पढ़ातीं ताकि शिक्षा में वह न पिछड़ें।
बराड़ा के अधोया में कार्यरत शिक्षक राजेश शर्मा ने अपना जीवन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले और जरूरतमंद बच्चों को समर्पित कर दिया है। राजेश भौतिकी विषय के लेक्चरर हैं, लेकिन प्रयास संगठन से जुड़कर आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े वर्ग के बच्चों की पढ़ाई से संबंधित तमाम जरूरतें पूरी करने का प्रयास करते हैं। दैनिक जीवन में साइंस की उपयोगिता कहां-कहां है प्रैक्टिकल के माध्यम से बच्चों को सिखाते हैं। अमेरिकन इंडियन फाउंडेशन से जुड़कर राजेश शर्मा ने कई प्रोजेक्ट भी तैयार किए। हाल ही में बेकार की वस्तुओं से सैनिटाइजर स्टैंड भी बनाकर दिखाया। यूट्यूब चैनल पर भी छोटी-छोटी क्लिप अपलोड कर बच्चों को विज्ञान की सीख देते हैं।
उगाला सीसे स्कूल मे बतौर ज्योग्राफी लेक्चरर कार्यरत शिक्षक अभिमन्यु भी अंबाला के शिक्षकों के लिए आदर्श हैं। वर्ष 2016 में जब इन्होंने स्कूल में कार्यभार संभाला था तो ज्योग्राफी में केवल तीन विद्यार्थी 12वीं कक्षा में थे, लेकिन इस सत्र में इनकी संख्या 12वीं में 59 और 11वी में 39 हो गई है। न केवल विद्यार्थियों बल्कि शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करने का काम अभिमन्यु कर रहे हैं। सैकड़ों शिक्षकों को सोशल साइंस और ज्योग्राफी विषय के लिए प्रशिक्षित करने का कार्य बतौर मास्टर ट्रेनर इन्होंने किया।
इनके द्वारा तैयार वीडियो लेक्चर लगातार एजुसेट चैनल, दीक्षा और अवसर एप पर प्रसारित हो रहे हैं।
सौंडा सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बतौर गणित अध्यापक कार्यरत दीपक मित्तल को उस समय स्कूल का जिम्मा मिला था जब वहां गणित का परिणाम 40 प्रतिशत भी नहीं था। हालात यह थे की सरकारी स्कूलों से भरोसा उठने लगा था। इसके बाद दीपक ने जिम्मा संभाला स्कूल के अलावा ग्रीष्म काल में अतिरिक्त कक्षाएं लगानी शुरू कर दी। परिणाम आए तो सब चौंक गए। पहली ही बार में 90 प्रतिशत रिजल्ट आया। इसके लिए दीपक को शिक्षा विभाग ने सम्मानित भी किया था। गत वर्ष भी स्कूल का गणित का परिणाम 94 प्रतिशत रहा।