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वेस्ट टू एनर्जी प्लांट, कचरे से बनेगी बिजली

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Waste to energy plant, electricity will be made from waste, Ambala - फोटो : Ambala
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उमेश भार्गव
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अंबाला। जिले में 280 करोड़ रुपये की लागत से वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाया जाएगा। चार साल पहले घोषित इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रोजेक्ट के पूरा होने पर न सिर्फ अंबाला और यमुनानगर में सफाई व्यवस्था दुरुस्त होगी, बल्कि यहां से उठाए जाने वाले कचरे से बिजली का उत्पादन संभव हो सकेगा।
अंबाला में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की घोषणा चार साल पहले तत्कालीन शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन ने की थी। तब से लेकर आज तक इस पर कोई काम नहीं हो सका। लेकिन अब इस प्रोजेक्ट के सिरे चढ़ने की आस जगी है। इसके लिए बाकायदा टेंडर भी अपलोड कर दिया गया है जोकि 27 सितंबर को खुलेगा। जिस भी कंपनी को यह टेंडर जारी होगा वह अंबाला में 22 साल तक काम करेगी यानी उसे 22 साल का वर्क ऑर्डर जारी किया जाएगा।
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दरअसल एनजीटी यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों के अनुसार कूड़े की न केवल छंटनी करनी है बल्कि इसका निस्तारण भी करना है। इसी के तहत अंबाला और यमुनानगर को एक कलस्टर में तब्दील किया गया है। अंबाला के अलावा नारायणगढ़ और बराड़ा व यमुनानगर के अलावा सढौरा और रादौर इन छह केंद्रों का कूड़ा पटवी में बनने वाले एनर्जी प्लांट में लाया जाएगा। इसके बाद इस कूड़े की छंटनी से लेकर बिजली पैदा करने तक की जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी। विदित हो कि चार साल पहले अंबाला कलस्टर में अंबाला के अलावा कुरुक्षेत्र और करनाल के निसिंग को शामिल किया गया था लेकिन अब कलस्टर बदले गए हैं।
अपने ही रुपयों से कंपनी लगाएगी प्लांट
वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाने की जिम्मेदारी टेंडर लेने वाली कंपनी की होगी। इस पर पूरा खर्च कंपनी ही वहन करेगी। कुल 280 करोड़ रुपये के प्लांट में से 22.5 प्रतिशत सब्सिडी यानी करीब 8 करोड़ रुपये राज्य सरकार कंपनी को देगी। इतना ही नहीं कूड़े के निस्तारण और कूड़े को एकत्रित करने के लिए उसे पटवी में जगह भी नगर निगम लीज पर उपलब्ध करवाएगा।
ठेकेदार क्यों करेगा इतनी राशि प्लांट पर खर्च
दरअसल दोनों जिलों से औसतन प्रतिदिन 550 टन कूड़ा निकलता है। अंबाला की बात करें तो यहां रोजाना करीब 250 टन कूड़ा निकलता है। इस कूड़े के उठान पर अंबाला में हर माह ढाई करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं यानी करीब 30 करोड़ रुपये सालाना। इसके अलावा निस्तारण पर होने वाला खर्च अलग है। इसी तरह यमुनानगर की स्थिति है। कुल मिलाकर ठेकेदार को एक साल में दोनों जिलों से 60 करोड़ रुपये कूड़ा उठान से ही हासिल होने की उम्मीद है, यानी करीब साढ़े 4 साल में लागत पूरी हो जाएगी। इतना ही नहीं कूड़े से पैदा होने वाली बिजली को बेचने के लिए कंपनी बिजली निगम से पावर परचेज एग्रीमेंट करेगी। पैदा होने वाली बिजली पावर ग्रिड में जाएगी। इस तरह बिजली बेचने से होने वाली आमदनी अलग रहेगी।
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पावर टू एनर्जी का प्रोजेक्ट 280 करोड़ रुपये का है। इसके लिए शहरी स्थानीय निकाय की ओर से टेंडर अपलोड कर दिया गया है जोकि 27 को खुलेगा। 22 साल तक का ठेका कंपनी को दिया जाएगा। कुल राशि पर करीब 22.5 प्रतिशत सब्सिडी सरकार कंपनी को देगी। - धीरेंद्र खडगटा, निगम आयुक्त।
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