अंबाला सिटी। दास्तान ए रोहनात नाटक मंचन को देखकर गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज सहित सभी दर्शक भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यह नाटक देखकर यह पता चलता है कि देश को आजाद करवाने में हिंदुस्तान के लोगों को कितनी कुर्बानियां और जुल्म सहने पड़े। उन लोगों की कुर्बानियों के बाद ही हम फख्र के साथ तिरंगा लहरा सकते हैं। उन्होंने दास्तान ए रोहनात नाटक को तैयार करने वाले निदेशक मनीष जोशी की संस्था को 25 लाख रुपये की राशि देने की घोषणा भी की।
बता दें कि भारत की आजादी के अमृत महोत्सव के कार्यक्रमों की श्रृंखला आजादी की पहली लड़ाई की 165वीं वर्षगांठ के अवसर पर दास्तान ए रोहनात नाटक का मंचन मंगलवार को छावनी के एसडी कॉलेज के सभागार में हुआ। इसमें बतौर मुख्य अतिथि गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने शिरकत की। गृह मंत्री ने कहा कि यह जानकर और भी दुख होता है कि इतिहासकारों ने हमें दास्तान ए रोहनात जैसे आजादी के आंदोलन की घटनाओं को क्यों नहीं पढ़ाया और बताया। जिस वक्त वह पढ़ रहे थे उस समय 1857 की क्रांति को क्रांति नहीं विद्रोह कहते थे। वहीं, इन कठिनाईयों के बारे में गूगल पर भी कुछ नहीं मिलता है, क्योंकि उनके बारे में इतिहास में दर्ज ही नहीं किया गया।
सूचना, जन संपर्क एवं भाषा विभाग द्वारा आयोजित दास्तान ए रोहनात नाटक में यशराज शर्मा ने देश की आजादी के लिए हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में गांव रोहनात से अपना बलिदान देने वाले नौंदा जाट की भूमिका में नजर आए। नाटक के दौरान मंच पर गांव रोहनात का कुआं और बरगद के पेड़ को साक्षात प्रतीक रूप में दिखाया गया। जहां अंग्रेजी हुकूमत ने गांव रोहनात वासियों पर जुल्म किए थे।
करोड़ों की लागत से बन रहा है शहीद स्मारक
गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि वह आजादी के इन हीरो की याद में शहीद स्मारक बनाने की मांग विधानसभा में उठाते आ रहे हैं। सरकारें बदलती रही और इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यह बड़े ही दुख की बात है कि आजादी के अनसंग हीरों की याद में कहीं कोई गीत नहीं गाया गया। जब हमारी सरकार आई और मैंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सामने यह बात रखी तो उन्होंने तुरंत सहमति दे दी। आज अंबाला छावनी में करोड़ों रुपये की राशि खर्च कर आजादी की पहली लड़ाई का स्मारक बनाया जा रहा है, जिसमें दास्तन ए रोहनात का भी जिक्र किया जाएगा और उसे दुनिया देखने आएगी।