अंबाला सिटी। जिस तरह से घर पर रहकर महिलाएं हर कार्य से न्याय कर रही हैं, उसी तरह समाज में अपने पेशे के अनुसार महिला अधिवक्ता लोगों को न्याय दिलवा रही हैं। इसके अलावा अन्य महिलाओं को कानूनी पाठ पढ़ाने के साथ-साथ उनके हकों की लड़ाई भी लड़ रही हैं। जिस तरह से हर क्षेत्र में महिलाएं आगे हैं, उसी तरह से कोर्ट में महिला अधिवक्ताओं की संख्या भी बढ़ रही है जो समाज में हो रहे बदलाव को दर्शा रहा है। अमर उजाला टीम ने महिला अधिवक्ताओं से बात करते हुए उनके विचारों को जाना ताकि अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो सकें।
आत्मनिर्भर और शिक्षित होना जरूरी
सभी महिलाओं को आत्मनिर्भर होना चाहिए, क्योंकि अधिकतर मामलों में देखा गया है कि पति से अनबन के बाद महिलाएं पति से तलाक ले लेती हैं। वे स्वयं कोई काम न आने के कारण पति पर ही निर्भर रहती हैं जो पूरी तरह से गलत है। समाज में आगे बढ़ने के लिए आत्मनिर्भर और शिक्षित होना जरूरी है।
- रीता सूरी, महिला अधिवक्ता।
लड़कों से की जाती है तुलना
महिलाओं की तुलना लड़कों के साथ की जाती है जो पूरी तरह से गलत है। परिवार के सदस्यों को ऐसी सोच रखनी चाहिए कि आज के दौर में महिलाएं किसी से भी कम नहीं हैं और क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। सभी को महिलाओं का सम्मान करने के साथ उन्हें हर कार्य के लिए प्रोत्साहित भी करना है।
- नेहा, महिला अधिवक्ता।
स्वयं बनानी होगी अलग पहचान
महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए स्वयं ही पहला कदम उठाना होगा, क्योंकि हर कार्य को स्वयं ही करना पड़ता है। संघर्ष के समय हर व्यक्ति अकेला होता है और जब सफलता हाथ लगती है तब लोग पीछे आते हैं। सभी महिलाओं को स्वयं की समाज में अलग पहचान बनाने के लिए कार्य करना चाहिए।
- सूरज रश्मी शर्मा, महिला अधिवक्ता।
भागेदारी बढ़ाने के संकल्प लें
अब समाज में महिलाओं का अधिक योगदान बढ़ गया है। हर क्षेत्र में महिलाएं आगे हैं। अभी भी बहुत से क्षेत्र ऐसे हैं, जिनमें महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है। नवरात्र के मौके पर सभी क्षेत्रों में महिलाओं की भागेदारी बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए और सभी महिलाओं को एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए।
- संजना, महिला अधिवक्ता।
सही राह दिखाना हमारा कर्तव्य
महिला अधिवक्ता के तौर पर जहां लोगों को सही राह दिखाना हमारा कर्तव्य है, उसी तरह समाज में भी हमें अपनी भागेदारी निभाते हुए समाज सेवा करनी चाहिए। जिससे किसी जरूरतमंद की मदद हो सके और उसे कुछ लाभ मिल सके। इसलिए महिलाओं को स्वयं आगे आकर कार्य करना होगा।
- बिंदू जैन, महिला अधिवक्ता।
बच्चियों की शिक्षा की ओर ध्यान दें
बहुत से मामले सामने आते हैं, जिनमें महिलाएं पढ़ी लिखी नहीं होती। इस कारण ससुराल में जाने के बाद उन्हें प्रताड़ित किया जाता है, जो पूरी तरह से गलत है। यह समाज का भी कर्तव्य बनता है कि छोटी बच्चियों की शिक्षा की ओर हम ध्यान दें, तभी यह समाज आगे बढ़ेगा और महिलाओं को सम्मान मिलेगा।
- स्वाति, महिला अधिवक्ता।
और आगे आने का करें प्रयास
हर महिला में देवी का वास होता है, बस जरूरत होती है तो पहचानने की, इसलिए किसी भी महिला को अपने आप को कम नहीं आंकना चाहिए। आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं को और अधिक आगे जाने का हमेशा प्रयास करते रहना चाहिए, तभी भागीदारी बढे़गी।
- अल्का शारदा, महिला अधिवक्ता।
कानूनी ज्ञान का होना भी जरूरी
बहुत बार महिलाएं इसलिए पीछे रह जाती हैं, क्योंकि उन्हें कानूनी ज्ञान नहीं होता है, इसलिए महिलाओं को कानूनी ज्ञान भी होना बहुत जरूरी है। सभी महिलाओं को अपने अधिकारों से संबंधित कानूनी ज्ञान जरूर लेना चाहिए जो भविष्य में महिलाओं के बहुत अधिक काम आएगा और वे जागरूक होंगी।
- शीतल शर्मा, महिला अधिवक्ता।
आगे बढ़ने को शिक्षा जरूरी
महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का हमेशा प्रयास करना चाहिए, परंतु हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है। बिना शिक्षा के इस समाज में कुछ भी नहीं है, इसलिए समाज को व स्वयं को भी शिक्षा प्राप्त करने और शिक्षा देने के लिए एक दूसरे को प्रोत्साहित करना चाहिए।
- कृति शर्मा, महिला अधिवक्ता।