अंबाला सिटी। जिला परिषद के चेयरपर्सन के विवाद के बाद से ही परिषद के पूरे कार्यकाल में ढंग से कार्य ही नहीं हो पाए। अब परिषद का कार्यकाल ही छह माह का रह गया है। नतीजतन पार्षद भी हताश होकर बैठ गए।
बीते एक वर्ष से जिला परिषद कि कोई भी बैठक नहीं हो पाई है। इतना ही नहीं विभिन्न गांवों में 15 करोड़ रुपये के बजट से होने वाले कार्य भी रुक गए हैं। पार्षद भी कहने लगे हैं कि इतनी मेहनत करने के बाद चुनाव में जीत मिली थी।
इसके बाद भी लोगों के कार्य नहीं करवा पा रहे हैं। करीब एक वर्ष से हाई कोर्ट में चल रहे मामलों को लेकर वीरवार को हाई कोर्ट के आर्डर आ गए हैं। जिसमें अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया दोबारा से करवाने के निर्देश हैं। मगर जिला परिषद के अधिकारी फिलहाल इस आर्डर पर कानूनी राय लेंगे इसके बाद ही आगे की कार्रवाई करवाएंगे।
जनवरी 2026 तक रहेगा कार्यकाल : जिला परिषद जनवरी 2022 में गठित हुई थी। जिसमें प्रधान सहित 15 सदस्यों का चुनाव किया गया था। जिसकी अंतिम बैठक वर्ष 2024 में नवंबर माह में हुई थी। बैठक के बाद ही अविश्वास प्रस्ताव जारी किया गया था। जिसमें तत्कालीन डीसी पार्थ गुप्ता ने अपने कार्यालय में हाथ खड़े करवाकर वोटिंग करवाई थी। मगर प्रधान राजेश कुमार लाडी को वोटिंग की इस प्रक्रिया पर एतराज था। इसी को लेकर उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। जिसके बाद से मामला हाई कोर्ट के अधीन था। वीरवार को हाई कोर्ट की ओर से गुप्त चुनाव करवाने के निर्देश जारी हुए हैं।एक जिला परिषद सदस्य के पास 30 से 35 गांव होते हैं। जिले में 402 ग्राम पंचायत हैं। परिषद की ओर से ग्रामीण क्षेत्र में श्मशानघाट, शेड, चारदिवारी, सामुदायिक भवन, आंगनबाड़ी, बस क्यू शेल्टर बनवाना के कार्य शामिल हैं। संवाद