अंबाला-दिल्ली नेशनल हाइवे से डीआरएम कार्यालय के रास्ते पर बना अंडरपास। संवाद
अंबाला। दिल्ली-अंबाला हाइवे से डीआरएम कार्यालय की तरफ जाने वाला रेलवे अंडरपास बारिश के दिनों में जलमग्न हो जाता है। अंबाला-दिल्ली रेल सेक्शन पर बने इस अंडरपास में पानी की निकासी के लिए बेशक एक तरफ भूमिगत पाइप डाले हैं लेकिन अंडरपास के एक हिस्से का स्तर नीचा होने के कारण कर्मचारियों सहित लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
रेलवे ने इस अंडरपास को सुरक्षित रखने के लिए तत्कालीन मंडल रेल प्रबंधक एमएस भाटिया के मार्गदर्शन में लाखों रुपये खर्च किए थे। इस दौरान अंडरपास की दीवारों को दुरुस्त किया गया और भूमिगत पाइप का भी रख-रखाव किया गया। बावजूद इसके जलभराव की समस्या बरकरार है। हल्की बारिश में ही अंडरपास का एक हिस्सा जलमग्न होे जाता रै और पानी की निकासी के लिए रेलवे को पंप लगाना पड़ता है।
अंकित किया खतरे का निशान
बारिश के दिनों में पिछले वर्ष एक कार इस अंडरपास में फंस गई थी क्योंकि कार चालक अंडरपास में भरे पानी का अंदाजा नहीं लगा पाया। गनीमत रही कि आसपास मौजूद लोगों ने जलभराव के बीच चालक को कार से सुरक्षित निकाल लिया। इसके बाद रेलवे ने सुरक्षा को देखते हुए अंडरपास की दीवारों पर संकेतक लगा दिए और एक मानव शरीर का चित्र भी ताकि खतरे का निशान देखकर कोई वाहन चालक अंडरपास से निकलने की कोशिश न करे।
ढलान के कारण आती है समस्या
अंडरपास के आसपास सड़कों का स्तर काफी ऊंचा है। यही कारण है कि पानी अंडरपास के नीचे आकर इकट्ठा हो जाता है। हालांकि इस मुख्य अंडरपास के रख-रखाव को लेकर रेलवे ने एक विशेष टीम का भी गठन किया है जोकि शिकायत मिलते ही तुरंत हरकत में आती है और अंडरपास पहुंचकर समस्या का समाधान करती है क्योंकि इसी रास्ते से डीआरएम सहित अन्य विभागीय अधिकारियों का आवागमन होता है।
वर्जन
पहले के मुकाबले डीआरएम कार्यालय की तरफ जाने वाले अंडरपास में काफी सुधार हुआ है। अब भारी बारिश के दौरान ही यहां कुछ जलभराव होता है, अन्यथा पुल के नीचे अब पानी जमा नहीं होता। अगर समस्या आती है तो इसका त्वरित समाधान करवा दिया जाता है।
निखिल, कार्यकारी अभियंता, रेल पुल निर्माण, अंबाला मंडल।