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बारिश की भेंट चढ़ी किसानों की छह माह की मेहनत

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जिले की अनाज मंडियों में प्रशासन की लापरवाही से किसानों की छह माह की मेहनत पर बारिश ने पानी फेर दिया। रविवार के बाद सोमवार हुई बारिश में किसानों का धान भीग गया। मंडियों में ज्यादातर बोरियों पर आढ़तियों ने तिरपाल बिछाई हुई थी। वहीं जो बारियां खुले आसमान के नीचे रखी थी, बारिश आते ही उनमें पानी भर गया।
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किसानों का कहना है कि अगर प्रशासन की ओर से सही समय पर धान की खरीद कर उसका उठान कर लिया जाता तो ऐसी नौबत नहीं आती। ऐसा हाल जिले भर की 14 मंडियों में दिखाई दिया, जहां किसानों की बोरियां खुले आसमान के नीचे बारिश में भीगती रही। मगर प्रशासन की ओर से इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
खड़ी धान को हुआ अधिक नुकसान
जिले में अभी धान की कटाई का कार्य बाकी है। किसानों की फसल खेतों में पककर तैयार खड़ी है। रविवार और सोमवार को हुई झमाझम बारिश ने किसानों की फसल को खेतों में ही बिछाकर रख दिया। ऐसे किसानों को अधिक नुकसान झेलना पड़ा है। किसान जल्द से जल्द अपनी फसल को मंडी में लाकर बेचना चाह रहे हैं।
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हमारी ओर से पूरा प्रयास किया जा रहा है। अगर कहीं लापरवाही बरती गई है तो उनका चालान काटकर आगे से ध्यान रखने के लिए कहा जाएगा।
-नीरज, सचिव, अनाज मंडी, अंबाला कैंट।
3,13,021 मीट्रिक टन धान की खरीद
किसानों के खाते में 427 करोड़ पहुंचे
अंबाला। जिला की सभी मंडियों और खरीद केंद्रों में धान की खरीद का कार्य जारी है। जिला की विभिन्न मंडियों में अब तक 3,13,021 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। इसके चलते 79 प्रतिशत का उठान और लदान किया जा चुका है।
जिला खाद्य एवं पूर्ति नियंत्रक अपार तिवारी तथा डीएम हैफेड कृपाल ने बताया कि उठान किए गए धान की 89 प्रतिशत पेमेंट हो चुकी है। 427 करोड़ रुपये किसानों के खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं। समय-समय पर मंडियों और खरीद केंद्रों का दौरा भी किया जा रहा है। सरकार द्वारा ग्रेड ए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1960 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि कॉमन धान का मूल्य 1940 रुपये। संवाद

मोहड़ा स्थित नई अनाज मंडी में बरसात में भीगती धान की बोरियां- फोटो : Ambala

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