अंबाला सिटी। नगर निगम को तीसरा मेयर मिल गया। नवनियुक्त शैलजा सचदेवा निगम में कार्यभार संभालने वाली तीसरी मेयर होंगी। शैलजा ने 20 हजार 487 मत से सबसे बड़ी जीत दर्ज की है।
इससे पहले 2013 में कांग्रेस से रमेश मल और 2020 में हरियाणा जनचेतना पार्टी से शक्ति रानी शर्मा मेयर चुनी गई थी। 2020 की बात करें तो तब शक्ति रानी शर्मा पहली प्रत्यक्ष मेयर चुनी गई थी, जो प्रत्यक्ष रूप से चुनी गई थी। बीते वर्ष उनके कालका से विधायक बनने के बाद नगर निगम में मेयर पद पर उप चुनाव हुआ।
अब शैलजा सचदेवा पहली बार भाजपा से मेयर बनी। वहीं, अमीषा चावला लगातार दूसरी बार मेयर चुनाव हारी हैं। अमीषा चावला को 2020 में 16 हजार 421 वोट मिले थे, जबकि इस बार 2025 में 20 हजार 133 वोट मिले।
2013 के चुनाव में कांग्रेस के रमेश मल मेयर बने थे। तब 67 प्रतिशत वोटरों ने अपने हक का इस्तेमाल किया था। 2020 मेयर चुनाव में हरियाणा जनचेतना पार्टी से शक्ति रानी शर्मा को 37 हजार 604, भाजपा की वंदना शर्मा को 29 हजार 520 वोट, हरियाणा डेमोक्रेोटिक फ्रंट की अमीषा चावला को 16 हजार 421 वोट और कांग्रेस की मीना अग्रवाल को 13 हजार 797 वोट मिले थे। हरियाणा जनचेतना पार्टी की शक्ति रानी शर्मा ने भाजपा की वंदना शर्मा को 8 हजार 84 मत से हराया था। तब शहर में एक लाख 87 हजार में से एक लाख 5 हजार 970 मतदाताओं ने मतदान किया था, जबकि 82 हजार लोग वोट डालने के लिए नहीं आए थे। बता दें कि शक्ति रानी शर्मा ने 2024 के विधानसभा चुनाव में कालका सीट पर भाजपा से चुनाव लड़ा था। उनके विधायक बनने के बाद नगर निगम का उपचुनाव हुआ है।
आवारा कुत्ते और बेसहारा पशु हैं समस्या
नगर निगम में अभी समस्याओं का अंबार है। शहर में बेसहारा गोवंश, आवारा कुत्ते सड़कों पर घूम रहे हैं। अभी तक नालों की सफाई की निविदा भी नहीं हुई है। शहर के लिए आई हुई नई स्ट्रीट लाइट निगम में बंद कमरे में हैं। अभी तक इन लाइट को लगाने के लिए निविदा नहीं हुई। शहर में सड़कों की हालत खराब है और बरसाती पानी की निकासी भी नहीं है। यही नहीं संपत्ति कर आईडी में त्रुटि होने से लोगों को परेशानी झेल रहे हैं। सफाई व्यवस्था के भी हाल खराब हैं।
भाजपा को सरकार और संगठन का फायदा
मेयर उप चुनाव में शहर में मतदान बेशक 31.5 प्रतिशत ही हुआ, लेकिन भाजपा उम्मीदवार शैलजा सचदेवा इसके बाद भी 20 हजार 487 वोट के अंतर से जीतीं। उनको पार्टी का संगठन मजबूत होने व प्रदेश में भाजपा की सरकार होने का फायदा मिला। वहीं, कांग्रेस धरातल पर कमजोर दिखी, क्योंकि कांग्रेस का संगठन न होने का नुकसान भी हुआ। कांग्रेस शहर में बड़ी जनसभा भी नहीं कर पाई।