अंबाला। पहले ही खेलो इंडिया गेम्स में प्रतिभाग करते हुए महाराष्ट्र की संयुक्ता कले ने स्वर्ण पदकों की झड़ी लगाकर सबका दिल जीत लिया। उनकी सफलता देख प्रशिक्षकों की आंखें नम हो गई। हूप, रिबन, बॉल व क्लब्स इवेंट में कोई भी खिलाड़ी संयुक्ता के स्कोर के आगे नहीं टिकता दिखाई दिया। दो से लेकर पांच प्वाइंट के फासले के साथ एक तरफा स्वर्ण पदक की दावेदार बनीं।
उनकी कोच मानसी व पूजा सरवे ने बताया कि शुरूआत से ही संयुक्ता का रिदमिक में खासा रुझान था। उन्होंने बताया कि 15 साल की संयुक्ता ने खेलो इंडिया के लिए रोजाना छह से सात घंटे तक जिम्नास्टिक हॉल में खूब पसीना बहाया था। संयुक्ता पूरी मेहनत और लग्न के साथ अभ्यास में लगी रहती थी। उसी का नतीजा है कि खेलो इंडिया में एक साथ पांच स्वर्ण पदकों पर कब्जा जमाया। वहीं, संयुक्ता का कहना था कि उनके पिता सरकारी कर्मचारी हैं और माता गृहिणी हैं। वह इकलौती हैं। परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया और हर कठिनाई में सहारा बने। चाहे फिर मैदान में छोड़ने तक का सफर हो या फिर गिरकर चोटिल होने के दौरान दोबारा से नए जोश के साथ खड़ा कर मैदान तक पहुंचाने का।
बोलीं- गेम पर फोकस स्वर्ण पदक का रास्ता
संयुक्ता कले का कहना था कि उनका फोकस पूरी तरह से अपनी गेम्स पर था। सोशल मीडिया से दूरी बना ली थी। ज्यादा जरूरत होने पर ही फोन का इस्तेमाल करती थी। दूसरे खिलाड़ियों को भी प्रेरित करते हुए संयुक्ता ने कहा कि गोल्ड मेडल हासिल करने का रास्ता केवल और केवल गेम के प्रति फोकस है। एक बार फोकस बिगड़ गया तो न अच्छे से अभ्यास होगा और न ही आप बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
खुशी में फिल्मी गीतों पर जमकर झूमी कोच और संयुक्ता
दो साल के लंबे इंतजार के बाद जीत की खुशी इस कद्र थी कि संयुक्ता व उसकी कोच फिल्मी गीतों पर जमकर झूमीं। संयुक्ता संग पांच गोल्ड के साथ सेल्फी लेने वालों का जमावड़ा लग गया। हर कोई संयुक्ता से उनके बेहतरीन प्रदर्शन के टिप्स को साझा करने के लिए प्रयास करता रहा। यही कारण था कि अवार्ड सेरेमनी के करीब एक घंटे तक मैदान में ही संयुक्ता कले व कोच ने जमकर खुशी मनाई। दूसरे खिलाड़ियों ने भी उनका साथ दिया।