अंबाला। गरीब परिवार में जन्मी किस्मत नगर की रितिका ने हैंडबॉल खेल को अपनाकर अपनी किस्मत बदल दी। दो बार जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में रजत पदक और एक बार सीनियर वूमेन नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर अपना और माता-पिता का नाम रोशन किया। रितिका बताती हैं कि कई बार खुराक के नाम पर उन्हें रोटी ही मिली मगर वह हारी नहीं और खेल में नाम कमाया।
इसके अलावा रितिका अपने छोटे भाई चहल बग्गन और बहन प्रियंका के लिए प्रेरणा स्रोत बन गईं। इस प्रेरणा से भाई बहन भी हैंडबाल के खिलाड़ी बन गए हैं। इस समय रितिका का भाई चहल बब्बन ने हैंडबाल में स्टेट तो बहन प्रियंका हैंडबाल में नेशनल स्तर पर खेल रही है।
ऐसे हुई रितिका की हैंडबॉल की शुरुआत
रितिका ने बताया कि जब वह बब्याल के राजकीय हाई स्कूल में सातवीं कक्षा में थी तक शिक्षिका मीनू के कहने पर हैंडबॉल का सफर शुरू किया। इसके बाद वह कोच संतोष के पास पहुंचीं। जिन्होंने रितिका को हैंडबॉल में तैयारी करवाई। हैंडबाल में रितिका की मेहनत और लगन ऐसी लगी की अब वह अंबाला सिटी के एसए जैन कालेज से बीएससी डिप्लोमा कर रही हैं। हैंडबॉल के नौ साल के सफर में रितिका ने कोच संतोष, कोच अशोक से एसडी कालेज में हैंडबाल की ट्रेनिंग ली। मौजूदा समय में वह छावनी के जीएमएन कॉलेज से कोच रमनदीप सिंह जांगड़ा से ट्रेनिंग ले रही हैं।
ये रही उपलब्धियां
- सातवीं कक्षा में कुरुक्षेत्र में स्टेट खेला जिसमें भागीदारी रही।
- 12वीं कक्षा में मध्यप्रदेश में पहला नेशनल खेल चौथे स्थान पर रही।
- गाजियाबाद में आयोजित जूनियर नेशनल चैंपियनशिप दूसरे स्थान पर रहकर रजत पदक जीता।
- कानपुर में आयोजित जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में रजत पदक जीता ।
- कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में चार बार खेल चुकी है औ चारों बार भागीदारी रही।
- दादर हवेली में आयोजित सीनियर वूमेन नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता ।
- इंटर कालेज में तीन बार स्वर्ण पदक जीता।
सीनियर वूमेन नेशनल चैंपियनशिप में ट्राफी के साथ नेशनल खिलाड़ी रितिका । स्वयं