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Ambala News: भाई तो कोई बेटा मान करती हैं लड्डू गोपाल की पूजा

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कृष्णा वंती
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अंबाला सिटी। भक्त के वश में है भगवान, भक्त बिना यह कुछ भी नहीं है, भक्त ही है इसकी जान...भजन की यह चंद लाइनें घर-घर विराजे लड्डू गोपाल जी व श्रद्धालुओं के बीच अटूट प्रेम और आस्था को दर्शाती है। जिलाभर के सैकड़ों ऐसी महिलाएं है जो कई वर्षों से लड्डू गोपाल जी की सेवा कर रही हैं।
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बेटा तो कोई अपना भाई समझकर कर शृंगार करता है। इतना ही नहीं अपने बेटे व परिवार के अन्य सदस्यों की तरह ही मानती हैं। तीनों समय के भोजन का भोग, घर में अकेला न छोड़ अपने संग घुमाने ले जाना, नए-नए वस्त्रों से शृंगार करते हैं। हर साल केक काटकर जन्मदिन भी मनाते हैं और आसपास के लोगों व रिश्तेदारों को बुलाते हैं। गर्मी में कूलर व पंखे तो सर्दियों में रजाई में सुलाया जाता है।
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छह वर्ष से करती हैं राधा-कृष्ण की पूजा
शालीमार कॉलोनी निवासी रचिता ने बताया कि छह वर्ष पहले राधा-कृष्ण के स्वरूप को घर लेकर आई थी। तब से अब तक वह उनकी पूजा करती है। घर में जो भी खाना बनाता है राधा-कृष्ण के लिए बिना प्याज और लहसून के बनाया जाता है। किसी भी समय घर पर अकेला नहीं छोड़ते हैं।
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बेटे की तरह दिया है कन्नू नाम
नीरज राणा ने बताया कि चार वर्ष पहले वह लड्डू गोपाल जी को अपने बेटे के रूप में लेकर आई थी। उन्हाेंने अपने बेटे नन्नू की तरह ही लड्डू गोपाल को कन्नू नाम भी दिया है। इतना ही नहीं मायके से जब उनके बच्चों के साथ- साथ लड्डू गोपाल के लिए भी कपड़े आते हैं। जब भी वे अपने पूरे परिवार के साथ कहीं जाती है तो लड्डू गोपाल जी को भी साथ लेकर जाती है। बेटे की तरह वह लड्डू गोपाल से बात भी करती है।
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गर्मी में लगाया छोटा कूलर
शिवानी ने बताया कि बीते 12 वर्ष से वह लड्डू गोपाल की पूजा कर रही है। मंदिर में लडडू गोपाल के लिए अलग से कूलर की भी व्यवस्था की है।अपनी शादी की सालगिरह पर ही लडडू गोपाल का जन्मदिवस मनाती है।
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केक काटकर मनाती है जन्मदिन
ज्योति भाटिया ने बताया कि पांच वर्ष से पहले वह लड्डू गोपाल को घर में लेकर आई थी। उनके बेटे के जन्मदिन पर ही वे लड्डू गोपाल का जन्मदिन मनाती है। जिस पर वे लड्डू गोपाल को घर में बना केक का भी भोग लगाती है। प्रत्येक जन्मदिन पर बेटे की तरह ही लड्डू गोपाल के लिए भी नए वस्त्र लेकर आती है।
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दुख-सुख के साथी हैं लड्डू गोपाल
75 वर्षीय कृष्णा वंती ने बताया कि वह 32 वर्षों से लड्डू गोपाल जी की पूजा करती है। जो भी दुख-सुख होता है तो वो उनसे सांझा करती है। उनके आशीर्वाद से सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है। पूरा परिवार एकजुट होकर उनकी सेवा करता है। हर माह नए-नए वस्त्रों से लेकर शृंगार आता है।

कृष्णा वंती

कृष्णा वंती

कृष्णा वंती

कृष्णा वंती

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