हाईकोर्ट के आदेश पर कैंट के बाजारों से पक्के अवैध कब्जे गिराए जाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। क्योंकि 20 जुलाई को म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन अंबाला ने हाईकोर्ट में इस बाबत डाली गई जनहित याचिका का जवाब दाखिल करना है, जिसमें हाईकोर्ट ने अंबाला के तमाम बाजारों से अवैध कब्जे हटवाने के लिए एमसीए अफसरों को आदेश दिए हुए हैं।
इसी कड़ी में 20 जुलाई से पहले एमसीए अफसर कैंट के चार बाजारों को पक्के कब्जों से मुक्त करने जा रहा है, जबकि अन्य बाजारों से भी कब्जों को हटाए जाने की प्लानिंग जारी है, उन्हें दिए जाने वाले नोटिस भी तैयार किए जा रहे हैं। इन बाजारों में दुपट्टे वाला बाजार, हनुमान मार्केट, हिल रोड स्थिति सब्जी मंडी मार्केट (खान ढाबे के साथ लगती) और पुल चमेली तक मटका बाजार व श्रीराम बाजार क्षेत्र शामिल हैं।
इन सभी बाजारों में करीबन दो नोटिस दुकानदारों को थमाए जा चुके हैं। इन सभी कब्जेधारियों को सात दिनों के भीतर खुद ही कब्जे हटवाए जाने का आदेश एमसीए के ज्वाइंट कमिश्नर गगनदीप सिंह की ओर से दिया जा चुका है। ये वो कब्जे हैं जिसे दुकानदारों ने सड़क तक पांच से पंद्रह फीट तक कब्जे कर रखे हैं और अपनी दुकान का नया शटर सड़कों पर लगा लिया है।
तोड़फोड़ के लिए एमसीए ने मांगा स्टाफ
इन बाजारों में तोड़फोड़ के लिए एमसीए अफसरों ने डीसी अंबाला से स्टाफ की मांग कर ली है, जिसमें एमसीए ने इस कार्रवाई के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिस स्टाफ की मांग की है। विभागीय सूत्रों की मानें तो डीसी कार्यालय की ओर से ड्यूटी मजिस्ट्रेट की नियुक्ति कर दी गई है और पुलिस स्टाफ के लिए डीसीपी कार्यालय को भी लिखा गया है। एमसीए की ओर से बाजारों में तोड़फोड़ के लिए जो शेड्यूल तैयार किया गया है, उसके तहत उक्त बाजारों में 8 से 15 जुलाई के बीच चार दिन तोड़फोड़ की कार्रवाई चलेगी। जबकि इसी बीच चार बाजारों की साथ-साथ एक और बाजार को भी नोटिस दिए जाने की भी तैयारी की जा रही है।
बाजारों में बांटे नोटिस, मचा हड़कंप
बृहस्पतिवार को इसी कड़ी में हिल रोड स्थित सब्जी मंडी मार्केट, मटका और श्रीराम बाजार मार्केट क्षेत्र में 100 के करीब दुकानदारों को नोटिस बांटे गए। इन सभी नोटिस में हाईकोर्ट के केस का हवाला देते हुए सात दिनों के भीतर खुद ही अपने पक्के कब्जे हटवाने के आदेश दिए गए हैं, अन्यथा एमसीए खुद इन पक्के कब्जे को हटाएगी। नोटिस में ज्वाइंट कमिश्नर ने यह भी कहा है कि यदि पक्के कब्जे एमसीए कार्यालय की जेसीबी मशीनों ने हटाए, तो नुकसान का जिम्मेवार दुकानदार खुद होंगे।
ये है मामला
उल्लेखनीय है वर्ष 2011 में अंबाला कैंट के बाजारों में सड़कों और नालों पर काबिज पक्के कब्जों को हटाए जाने के लिए एडवोकेट एसकेएस बेदी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी। जिसके तहत हाईकोर्ट ने एमसीए अफसरों को तुरंत प्रभाव से बाजारों से नालों व सड़कों पर पक्के कब्जे हटवाए जाने के आदेश दिए थे। लेकिन अदालत के आदेशों के बावजूद ये कार्रवाई बहुत धीमी गति से चलती रही। जिस पर याचीकर्ता ने अवमानना याचिका लगाई, जिस पर जज ने सख्ती दिखाते हुए फिर से एमसीए अफसरों को आदेश दिए थे कि 20 जुलाई 2016 तक तमाम बाजारों को कब्जा मुक्त कर रिपोर्ट हाईकोर्ट को दी जाए। इसी के चलते एमसीए अपनी कार्रवाई में जुटा हुआ है।
जो सालों से बैठे हैं ये न समझें कब्जा हमारा हो गया
अंबाला कैंट व सिटी में अवैध कब्जों के हालात काफी गंभीर हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल कैंट के बाजारों में कार्रवाई चल रही है। जो सालों से सड़कों व नालों पर पक्के कब्जे करके बैठे हैं, वे दुकानदार ये न समझें कि पक्के कब्जे हमेशा के लिए उनके हो गए। कानून से बढ़कर कोई नहीं। ये कब्जे पहले किन कारणों से नहीं हटे, उस बारे में कुछ नहीं कह सकता, लेकिन अब बाजारों में पक्के व कच्चे अवैध कब्जे व अतिक्रमण बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगा। लोगों व दुकानदारों से अपील है खुद ही पक्के अवैध कब्जे सड़कों व नालों से हटा लें, यदि एमसीए ने कार्रवाई की तो नुकसान के जिम्मेवार खुद कब्जेधारी ही होंगे। 20 जुलाई को एमसीए हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल करेगा।
-दिनेश यादव, कमिश्नर, म्यूनिसिनपल कॉरपोरेशन अंबाला-
तारीख नजदीक आते ही याद आती है कार्रवाई
इस बार में जज साहब को एमसीए अफसरों की कार्यप्रणाली से अच्छे तरह से वाकिफ करवाऊंगा। हाईकोर्ट में न्यायधीशों की बैंच को बताऊंगा कि हर बार जब भी पेशी की डेट नजदीक आती है, तभी एमसीए कुछेक बाजारों में कब्जे हटवाने की प्रक्रिया चलाता है, वरना महीनों ऐसे ही गुजार देता है, जिस वजह से ये केस पांच साल से अदालत में लटका पड़ा है। अदालत ने 20 जुलाई तक कैंट के तमाम बाजारों से पक्के व कच्चे अवैध कब्जे हटवाने के आदेश दिए थे, लेकिन एमसीए अफसर चार बाजारों में कार्रवाई कर हाईकोर्ट से फिर डेट लेने की तैयारी में है। एमसीए अफसरों व निचले कर्मचारियों की ढुलमुल कार्रवाई की वजह से ये केस लटक रहा है। इस बार हाईकोर्ट में सारी कार्यप्रणाली से अवगत करवाऊंगा।
एडवोकेट एसकेएस बेदी, जनहित याचीकर्ता-