हरिंदर पाल सिंह
अंबाला। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की अहम कड़ी रहे छावनी का नाम जल्द ही विश्व पटल पर सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। यहां के शहीदों ने जो कुर्बानियां दीं वो हमेशा याद रखी जाएंगी। सरकार ने हालिया बजट में इस वर्ष शहीद स्मारक के उद्घाटन की बात कही है।
इस परियोजना की अमर उजाला टीम ने बुधवार को पड़ताल की। इसमें पाया कि परियोजना पर 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। शेष 10 प्रतिशत कार्य में साज सज्जा का काम बाकी है। इसमें दो माह में पूरा करने का लक्ष्य है। सब कुछ ठीक रहा तो मई के बाद कभी भी इस परियोजना पर काम पूरा हो सकता है। इसके बाद केबिनेट मंत्री अनिल विज इस परियोजना के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री से समय मांगेंगे।
छावनी में निर्माणाधीन शहीदी स्मारक में शहीदों के योगदान को डिजिटल और कलाकृतियों के माध्यम से दर्शाया जाएगा। इसे देखकर लोगों में देशप्रेम की भावना तो जागृत होगी ही, साथ ही वो अंबाला की मिट्टी को भी अपने माथे पर लगाने के लिए मजबूर हो जाएंगे। शहीद स्मारक लगभग 500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। सरकार इस वर्ष लोगों को शहीद स्मारक सुपुर्द करेगी।
एशिया का पहला तो भारत में सबसे बड़ा स्मारक
अंबाला-दिल्ली नेशनल हाईवे पर निर्माणाधीन शहीद स्मारक एक देश-दुनिया के लिए एक यादगार होगी। इसे जल्द ही एशिया के पहले और भारत के सबसे बड़े शहीद स्मारक का दर्जा भी हासिल होगा। इस स्मारक को डिजिटल तरीके से तैयार किया जा रहा है जोकि 22 एकड़ के हिस्से में सुसज्जित है। इसमें कमल के फूल का मेमोरियल टॉवर भी तैयार किया जा रहा है जोकि शहीदों को समर्पित होगा और यहां शहीदों के नाम भी अंकित किए जाएंगे।
अहम कड़ी होंगे 250 प्रोजक्टर्स
लगभग 167 साल पहले 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में जो घटनाएं हुई, उनका जीवंत चित्रण 250 से अधिक प्रोजेक्टर्स की मदद से किया जाएगा। यह प्रोजेक्टर्स शहीद स्मारक में बनाई 22 गैलरियों में लगाए हैं। इनके अवलोकन से ही लोग अभिभूत हो जाएंगे, उन्हें ऐसा लगेगा कि वो भी इस लड़ाई का हिस्सा बन गए हैं। सबसे बड़ा आकर्षण पानी की झील पर लाइट और ध्वनि का मिश्रित शो होगा जोकि ओपन एयर थियेटर में पानी पर दर्शाया जाएगा।
सात साल पहले शुरू हुआ था काम
हरियाणा सरकार ने जिस भूमि पर डंपिंग जोन बनाया था, वहां मौजूदा समय में एक शहीद स्मारक बना दिया गया है। वर्ष 2018 में शुरू हुए शहीद स्मारक के निर्माण का कार्य लगभग 200 करोड़ में पूरा किया जाना था। इसका श्रेय कैबिनेट मंत्री अनिल विज को भी जाता है। शहीदों की गाथा को जनमानस तक पहुंचाने के लिए यहां आर्ट वर्क का काम शुरू कराया। आमजन की सुविधा के तहत हैलीपेड, भूमिगत कार पार्किंग और रिहायशी क्षेत्र का निर्माण कराया। इस कारण इसकी अनुमानित लागत में भी लगभग 300 करोड़ की बढ़ोतरी हो गई।
यहां 250 कर्मचारी कर रहे काम
शहीद स्मारक में देश के प्रसिद्ध कारीगर काम कर रहे हैं जोकि ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश और पंजाब आदि से आए हुए हैं। लगभग 250 कारीगर दिन-रात काम में जुटे हुए हैं। पूरी तन्मयता के साथ अपना-अपना काम कर रहे हैं। कोई चित्र उकेर रहा है तो कोई मॉडल तैयार कर रहा है, वहीं डिजिटल टीम प्रोजेक्टर्स के माध्यम से शहीद गाथा का चित्रण करने के लिए कार्रवाई में जुटी है।