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Ambala News: रेलवे स्टेशन की पार्किंग में सुरक्षा अधूरी

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अंबाला। अंबाला छावनी के अतिसंवेदनशील रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा में चूक दिखाई देती है। यहां पार्किंग में पुराने दोपहिया वाहन खड़े हैं, जिनका कोई अता पता नहीं है। वहीं वाहनों की जांच के नाम पर कोई सिस्टम नहीं है। ऐसा तब है जब पूर्व के वर्षों में रेलवे स्टेशन को कट्टरपंथियों की ओर से कई बार धमकियां भी दी जा चुकी हैं। यहां पार्किंग में सुरक्षा चूक को इसी प्रकार समझा जा सकता है कि पार्किंग ठेकेदार के पास न तो सुरक्षा जांच के लिए उपकरण हैं और न ही यहां पर आरपीएफ और जीआरपी की स्थाई नजर रहती है।
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ऐसे में इतने संवेदनशील स्टेशन पर कोई भी संदिग्ध वाहन आसानी से एंट्री कर सकता है और पार्किंग में वाहन खड़ा किया जा सकता है। शनिवार को जब पार्किंग में पड़ताल की गई तो पाया कुछ दोपहिया वाहन वर्षों से खड़े हैं। हालात ऐसे हैं कि उनके ऊपर झाड़ियां उग चुकी हैं। किसी ने यह तक पूछने की कोशिश नहीं की कि इनका मालिक कौन है। वहीं रेलवे स्टेशन पर पार्किंग का नया ठेका शुरु हो गया है। नए ठेकेदार ने पार्किंग में पहली बार कैमरे लगाए हैं। मगर यहां एक ही कैमरा है वह भी एंट्री तक ही सीमित है।

पर्ची काटकर हो रही खानापूर्ति
रेलवे स्टेशन की पार्किंग में आने वाले वाहनाें की पर्ची काटकर खानापूर्ति हो रही है। न तो वाहन की डिग्गी को चेक किया जाता है और न ही वाहन के दस्तावेज देखे जाते हैं। हैरानी की बात है कि कई-कई वाहन एक-एक माह तक पार्किंग में खड़े रहते हैं, लेकिन इनकी सूध लेने वाला कोई नहीं है। ऐसा ही एक वाहन एक अप्रैल से एस्कलेटर के सामने पार्किंग में खड़ा था जोकि शुक्रवार को ही एक व्यक्ति पर्ची दिखाकर ले गया। लेकिन पार्किंग में तैनात कर्मी ने इसकी जानकारी आरपीएफ व जीआरपी को देना भी जरूरी नहीं समझा।
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पंजाब व हिमाचल नंबर के वाहन
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन की पार्किंग में कुछ दोपहिया वाहन कंडम हालत में खड़े हुए हैं। इनकी जानकारी न तो पार्किंग ठेकेदार के पास है और न ही रेलवे कर्मचारी के पास। जबकि इन वाहनों पर पंजाब व हिमाचल की नंबर प्लेट लगी हुई हैं। इन वाहनों को देखकर लगता है कि या तो इन्हें चोरी करके यहां खड़ा कर दिया गया, या फिर किसी वारदात के बाद इन दोपहिया वाहनों को पार्किंग में लावारिस हालत में छोड़ दिया गया है।
रेलवे स्टेशन को उड़ाने की मिल चुकीं धमकियां
उत्तर रेलवे के अंबाला रेल मंडल का सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त रेलवे स्टेशन अंबाला कैंट है। यहां से रोजाना 300 से अधिक ट्रेनों का आवागमन होता है। यात्रियों की संख्या भी रोजाना के हिसाब से 50 हजार से अधिक है। ऐसे में स्टेशन की सुरक्षा को लेकर आजतक कोई भी ठोस योजना तैयार नहीं हो सकी। जबकि अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन को उड़ाने की पूर्व में दर्जनों धमकियां भी मिल चुकी हैं।
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हादसे के बाद होता है अलर्ट
हादसे के बाद ही अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर अलर्ट घोषित किया जाता है और फिर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क होकर जांच अभियान आरंभ कर देती है। कश्मीर के पहलगाम में हुए हादसे का असर अब अंबाला कैंट स्टेशन पर भी देखा जा रहा है। सुरक्षा को लेकर जीआरपी व आरपीएफ संयुक्त रूप से लगातार जांच अभियान चलाकर यात्रियों का सामान खंगाल रहे हैं।
बैठकों तक सीमित रही सुरक्षा
रेलवे स्टेशन की सुरक्षा को लेकर कई बार बैठकों का दौर हो चुका है। खुफिया एजेंसियों के साथ सेना के अधिकारी भी इन बैठकों में सुरक्षा को लेकर चिंतित नजर आए हैं। बाकायदा इस संबंध में खामियों से संबंधित जानकारी भी उच्चाधिकारियों को दी जा चुकी है। बावजूद इसके रेलवे स्टेशन पर न तो मैटल डिटेक्टर की सुविधा है और न ही चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था। अगर गलती से कोई संदिग्ध व्यक्ति रेलवे स्टेशन पर प्रवेश कर गया तो फिर हालात काफी भयावह हो सकते हैं।
रेलवे स्टेशन पर खड़ी कार से मिला आरडीएक्स
लगभग 14 वर्ष पूर्व रेलवे स्टेशन की पार्किंग में आरडीएक्स विस्फोटक से भरी कार मिली थी। मामला 12 अक्टूबर 2011 का है। कार से भारी मात्रा में आरडीएक्स, डेटोनेटर और टाइमर मिले थे। सुरक्षा में इस चूक ने रेलवे और सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए थे, आज तक भी देश की सुरक्षा एजेंसियां ही नहीं बल्कि पुलिस भी इस मामले को सुलझा नहीं पाई है।
वर्जन
रेलवे स्टेशन की सुरक्षा को लेकर आरपीएफ व जीआरपी संयुक्त रूप से कार्य कर रही है। जरूरत पड़ने पर जिला पुलिस की भी मदद ली जाती है। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए कुछ योजनाओं पर कार्य चल रहा है।
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विनोद भाटिया, डीआरएम अंबाला।
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