कुरुक्षेत्र। 35 साल पहले 1985 में अलॉट हुआ सेक्टर 17 कभी शहर का हार्ट होने की शान था। अब इस सेक्टर की पहचान टूटी व अंधेरे में डूबी सड़कें व डंपिंग साइट के रूप में बन चुकी है। कभी हुडा तो कभी नगर परिषद के अधीन आने वाले इस सेक्टर में समस्याएं कम होने की बजाए बढ़ती ही रही। पांच साल से सफाई का टेंडर नहीं होने के कारण सेक्टर में कई जगहों पर कचरे के ढेर लग हुए हैं।
सेक्टर की अधिकतर सड़कें खस्ताहाल है। शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता है। कहीं हाई मास्क लाइट जल ही नहीं रही तो कहीं से गायब ही हो चुकी है। दो से चार मीटर ऊंचाई तक ही लगे खंभों पर खुले बिजली मीटर खुले पड़े हैं। सीवरेज ब्लॉक पड़ा है तो पार्किंग स्थलों पर झाड़ियां उग चुकी है। एससीओ के बरामदों पर ग्रीलों से अवैध कब्जे कर लिए गए हैं। अधिकतर पार्किंग टूटी पड़ी है तो कानफोडू जनरेटर दिन भर गूंजते हुए पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
किराएदारों का नहीं हो रहा पुलिस वेरिफिकेशन
सेक्टर को सामान्य ही नहीं पुलिस प्रशासन ने भी लावारिश हालात में छोड़ दिया है। एससीओ किराए पर लिए हुए लोगों का पुलिस वेरिफिकेशन तक नहीं कराया जा रहा। शाम ढलते ही चारों ओर शराब की बोलते खुलने लगती है तो खूब हंगामा भी होता है। सबसे ज्यादा खराब हालात फूड मार्केट के आसपास ही रहते हैं। बुलेट के पटाखे तो आम बात है। यहीं पर चद्दर में बांधकर शव फेंक दिया गया था तो कईं बार सरेआम तेजधार हथियार तक चल चुके हैं। पुलिस गश्त न के बराबर है। यहां तक कि एससीओ के बरामदों में अनजान लोगों की टोलियां आम बात है।
रामभरोसे हुआ सेक्टर तो शिकायतें करनी भी छोड़ी : राजेश्वर
राजेश्वर गोयल बताते हैं कि 2004 में सेक्टर में रेजिडेंट वेल्फेयर एसोसिएशन बनी, जिसमें पहले प्रधान सुरेंद्र गुप्ता बने थे। उनके बाद वे खुद भी छह साल तक प्रधान रह चुके हैं। वे बताते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब यह सेक्टर शहर का हार्ट कहलाता था। यहां एक अगस्त 1997 में तत्कालीन राज्यपाल महाबीर प्रसाद ने इस सेक्टर में बनाए गए वाणिज्यक केंद्र का उद्घाटन किया था। आकर्षक फव्वारे चलने लगे थे। व्यवसायिक गतिविधियों के लिए हटें बनाई गई लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ मिटने लगा। सामान्य पार्क बना तो 24 जून 2022 में तत्कालीन विधायक सुभाष सुधा द्वारा इसके मरम्मत कार्य का उद्घाटन किया गया लेकिन आज भी यह बदहाल है।
समस्याओं से घिरे सेक्टर के हालात को लेकर प्रशासन ही नहीं मुख्यमंत्री तक भी शिकायतें दी लेकिन किसी ने भी गंभीरता से नहीं लिया तो शिकायतें करनी ही छोड़नी पड़ी। आज यह सेक्टर रामभरोसे ही है। सबसे बड़ा व्यवसायिक सेक्टर होने के बावजूद आज तक सार्वजनिक सीसीटीवी कैमरे तक नहीं। पिछले 10 वर्षों से आरडब्ल्यूए व सेक्टरवासियों की प्रशासन से बैठक तक नहीं हुई। पांच साल से सफाई टेंडर तक नहीं इसके बावजूद चार साल से गार्बेज चार्ज तक वूसला जा रहा।
हल्की बारिश में ही तालाब बन जाता है सेक्टर : विजय सासन
इसी सेक्टर में अनेक वर्षों से इंश्योरेंस कार्य कर रहे विजय शासन का कहना है कि सेक्टर में सड़कें टूटी पड़ी है तो सीवरेज भी ब्लॉक है। हल्की बारिश होते ही सेक्टर तालाब बन जाता है। यहां न अतिक्रमण पर कोई कार्रवाई न ही अवैध गतिविधियों पर। साफ-सफाई से लेकर अन्य सुविधाएं भी पूरी तरह शून्य हो चुकी है।
यह है सेक्टर का ब्योरा
वर्तमान में 106 एससीओ प्लॉट है, जिनमें 99 फीसदी बी है। 1985 में सेक्टर बनाया तो एससीओ के 101 प्लॉट काटे गए थे। पांच प्लाट कुछ वर्ष पहले ही काटे।
200 बूथ है, करीब 20 साल पहले यहां शॉपिंग मॉल बना। करीब छह साल से फूड मार्केट है, जो पार्किंग में स्थापित की हुई है। दो पेयजल टयूबकेल है।
सेक्टर में ब्लड बैंक, एलआईसी, काराधान, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालयों के अलावा अनेक निजी व बड़ी कंपनियों के कार्यालय है।
आधा दर्जन अस्पताल, 10 हजार स्क्वेयर मीटर का पार्क है।
सेक्टर के एक ओर टेक्सी स्टैंड व पुराना बस अड्डा है तो दूसरी ओर आर्य समाज मार्केट व रिहायशी क्षेत्र भी।
कुरुक्षेत्र। सेक्टर 17 आरडब्ल्यूए के पूर्व प्रधान राजेश्वर गोयल चर्चा करते हुए। संवाद
कुरुक्षेत्र। सेक्टर 17 आरडब्ल्यूए के पूर्व प्रधान राजेश्वर गोयल चर्चा करते हुए। संवाद
कुरुक्षेत्र। सेक्टर 17 आरडब्ल्यूए के पूर्व प्रधान राजेश्वर गोयल चर्चा करते हुए। संवाद
कुरुक्षेत्र। सेक्टर 17 आरडब्ल्यूए के पूर्व प्रधान राजेश्वर गोयल चर्चा करते हुए। संवाद
कुरुक्षेत्र। सेक्टर 17 आरडब्ल्यूए के पूर्व प्रधान राजेश्वर गोयल चर्चा करते हुए। संवाद
कुरुक्षेत्र। सेक्टर 17 आरडब्ल्यूए के पूर्व प्रधान राजेश्वर गोयल चर्चा करते हुए। संवाद