अंबाला सिटी। छह माह बाद सोमवार को पंचायत भवन में हुई नगर निगम सदन की बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। 5 घंटे चली इस बैठक में अमरूत योजना, 6 साल में चौक के निर्माण पर खर्च हुए 32 करोड़, स्वच्छता और सैनिटाइजेशन में धांधली के आरोप लगाते हुए पार्षदों ने जमकर हंगामा किया। इतना ही नहीं अनापत्ति प्रमाण पत्र में भ्रष्टाचार के आरोप भी पार्षदों ने भरे सदन में न केवल लगाए बल्कि इसके प्रमाण भी दिए लेकिन अधिकारी कोई जवाब नहीं दे पाए।
अलबत्ता बैठक बेनतीजा रही। किसी भी वार्ड पार्षद के मुद्दे को सदन में पेश नहीं किया जा सका। पिछली बैठक के एजेंडों में से अभी 22 के जवाब ही ईओ जरनैल सिंह दे पाए थे कि भाजपा पार्षद हितेष जैन का बीपी-शुगर कम होने के कारण मेयर शक्तिरानी शर्मा ने बैठक को स्थगित करने के आदेश जारी कर दिए। इस दौरान तक प्रश्नकाल में पार्षदों से दो-दो समस्याएं उनके वार्ड की पूछी गई। इसके बाद पिछली बैठक में पास हुए 34 प्रस्तावों में से 22 प्रस्ताव और उन पर टिप्पणी पेश की जा सकी थी। बैठक में 20 में से 19 पार्षद मौजूद रहे।
किन मुद्दों पर घिरे रहे अधिकारी, नहीं दे पाया कोई जवाब
3 लाख लेकर एनडीसी जारी करने के आरोप
पार्षद विजय चौधरी और मिथुन वर्मा ने सदन को बताया कि नगर निगम 1100 वर्ग गज कॉमर्शियल जगह के ही अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर सकता है लेकिन एक प्राइवेट कंपनी को 5274 और दूसरी को 9800 वर्ग गज के अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। भरे सदन में इसके कागजात भी दिखाए गए। हजपा और कांग्रेस सहित एचडीएफ के पार्षदों ने आरोप लगाते हुए कहा कि अमीरों को नियम-कायदे ताक पर रखकर एनडीसी जारी की जा रही है जबकि गरीब और आम जनता-तीन-तीन माह से धक्के खा रही है। भाजपा पार्षद मोनिका मल ने कहा कि 3 लाख रुपये लेकर 5 हजार से ज्यादा जमीन की एनडीसी जारी की गई हैं।
अमरूत योजना पर नहीं दे पाए कोई जवाब
76 करोड़ से ज्यादा की लागत से अंबाला शहर में अमरुत योजना के तहत पेयजल और सीवरेज लाइन डाली गई। इस पर हजपा के पार्षद राजेश मेहता, कांग्रेस के मिथुन वर्मा, एचडीएफ केे टोनी चौधरी, हजपा के ही राकेश सिंगला, सरदूल सिंह सहित अन्य ने कहा कि इसमें भारी भ्रष्टाचार हुआ है। जमीन के ऊपर ही पाइप रख दिए गए जोकि गटका डालने के बाद 4 फुट नीचे रखी जानी थी। इसी तरह इंटरलॉकिंग टाइलों के चक्कर में पूरे शहर का बेडा गर्क कर दिया। एक नेता इंटरलॉकिंग टाइलों की अपनी फैक्टरी है इसीलिए पूरे शहर में टाइलें लगवा दी गई। इसी कारण सीवरेज डलने के बाद सारी गलियां धंस गई। राजेश मेहता, राजिंद्र कौर, विजय चौधरी व अन्य ने कहा कि उनके वार्ड में कई एरिया ऐसे हैं कि लोगों को इसी कारण कई किलोमीटर दूर से पेयजल लाना पड़ रहा है।
पांच हजार लीटर मंगवाया था सैनिटाइजर आया 3600 लीटर
पार्षद विजय चौधरी ने सदन को बताया कि कोरोना की पहली और दूसरी लहर में 5-5 हजार लीटर सैनिटाइजर मंगवाया गया था, लेकिन 18 ड्रमों में दोनों बार सैनिटाइजर आया। एक ड्रम का वजन 200 किलो था। इस तरह 3600-3600 लीटर ही सैनिटाइजर आया। पार्षद विजय बोले कि क्या शेष 1400-1400 लीटर सैनिटाइजर कहां गया। इस मामले की जांच सदन के समक्ष उठाई गई।
15 चौक पर 32 करोड़ हुए खर्च
बैठक में कांग्रेस की पार्षद मेघा गोयल ने बताया कि पिछले 6 साल में 15 चौक पर 32 करोड़ रुपये से खर्च किए गए। इन सभी चौक में धांधली हुई। इतने रुपये में तो 100 बेड का अस्पताल बनाया जा सकता था। इसकी भी भरे सदन से जांच की मांग की गई।
सैनिटाइजर के मामले पर अधिकारियों से जवाब सदन की ओर से मांगा गया है। एनडीसी किस तरह इतनी जमीन की हुई उसके बारे में भी जवाब मांगा है। जहां तक एक्सईएन रमन की बात है तो उन्हें एक बार मौका दिया गया है। उन्होंने सदन से इसके लिए खेद भी जताया है। शेष अन्य मामलों की जांच का आश्वासन आयुक्त ने दिया है।
-शक्तिरानी शर्मा, मेयर।
Ruckus in the House over corruption, development issues missing- फोटो : Ambala