अंबाला सिटी। शिक्षण कार्य के साथ-साथ महिला अध्यापिकाएं और प्राचार्य समाज सुधार के कार्यों में भाग लेते हुए नारी सशक्तिकरण और बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने का कार्य कर रही हैं। वह अपने विचारों के माध्यम से स्कूल व कॉलेज की नई पीढ़ी में संस्कार व शिक्षा का संचार करते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वहीं ऐसे बच्चों की फीस भरते हुए उन्हें स्कूली शिक्षा प्रदान करवा रही है जो आर्थिक तंगी के कारण स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। ऐसी ही अध्यापिकाओं व प्राचार्य से अमर उजाला टीम ने नवरात्र की पूर्व संध्या पर बात की। टीम ने उनके शिक्षा क्षेत्र और नारी उत्थान के लिए उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों को सराहा ताकि अन्य महिलाएं भी इन इनसे प्रेरणा लेते हुए जीवन में नया मुकाम हासिल कर सकें।
सुनीता कुमारी एसडी कन्या महाविद्यालय में बच्चों को शिक्षा देने के साथ ही जरूरतमंद बच्चों की फीस भी अपने वेतन से देती आ रही हैं। 32 साल तक शिक्षक का कार्य करने के पश्चात पिछले माह ही सेवानिवृत्त हुई हैं। वे अब भी बच्चों के शिक्षण कार्य में पूर्ण सहयोग कर रही हैं।
प्राध्यापिका डॉ. राजेंद्रा जीएमएन कॉलेज में संस्कृत विभाग की प्रो. होने के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई के लिए फीस देकर उनकी मदद करती हैं। इसके अलावा उनकी ओर से जरूरतमंद बच्चों में समय-समय पर जरूरत का सामान भी वितरित किया जाता है।
एसडी कॉलेज में हिंदी विषय की प्राध्यापिका और एनसीसी की कैप्टन डॉ. विजया शर्मा भी बच्चों को शिक्षा देने के साथ-साथ जरूरतमंद बच्चों की मदद कर रही हैं। उन्होंने जरूरतमंद बच्चों को गोद लिया हुआ है। उनका पढ़ाई से जुड़ा खर्चा उन्हीं की ओर से उठाया जाता है।
एमडीएसडी कॉलेज की प्राचार्य डॉ. किरण आंगरा समाज सुधारक हैं, वहीं जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई में भी मदद कर रही हैं। उनके कॉलेज की ओर से खेल प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेने वाली खिलाड़ियों को विशेष रूप से स्कॉलरशिप व अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
सोहन लाल डीएवी की प्राचार्य नीरू अरोड़ा शिक्षण क्षेत्र में बेहतरीन कार्य कर रही हैं। वहीं समाज सुधार को लेकर भी विद्यार्थियों की मदद से कई प्रकल्प चला रही हैं ताकि बच्चों का भी सर्वांगीण विकास हो सके और समाज सुधार भी किया जा सके।
शिवालिक इंटरनेशनल स्कूल की प्राचार्य अनुराधा भाटिया स्कूल स्तर के साथ ही बाहर भी समाज सुधार को लेकर कार्य कर रही हैं। उनका कहना है कि महिलाओं को आगे आकर समाज सुधार को लेकर कार्य करना चाहिए ताकि महिलाएं विकास की राह बना सकें।
एसडी कॉलेज से अंग्रेजी विभाग की भूतपूर्व अध्यक्ष डॉ. नीना मल्होत्रा ने 38 वर्षों तक अध्यापक का कार्य किया। वहीं लड़कियों को अच्छी शिक्षा प्राप्त करके अपने पैरों पर खड़ा होने की प्रेरणा दी। वे विभिन्न संस्थाओं से जुड़कर नारी सशक्तिकरण को लेकर कार्य कर रही हैं।
गर्वनमेंट स्कूल नन्हेड़ा में शिक्षिका शीतल गोहिल बच्चों को शिक्षा देने के साथ ही समाज सुधार को लेकर कार्य कर रही हैं। उनका कहना है केवल नवरात्र ही नहीं, बल्कि जीवन भर महिलाओं का सम्मान करना चाहिए। महिलाओं को एक अलग पहचान बनानी चाहिए।
केंद्रीय विद्यालय नंबर 2 की प्राचार्य प्रियंका त्यागी ने कहा कि शिक्षा जीवन का एक अहम हिस्सा है। बिना शिक्षा के जीवन में आगे बढ़ पाना किसी भी तरह से संभव नहीं है। खासकर नारी शक्ति को आगे आते हुए शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए।