- सरकारी स्कूलों को मॉडल संस्कृति व पीएम श्री स्कूलों में तब्दील तो किया पर सुविधाएं नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
जलबेडा। राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों को मॉडल संस्कृति व पीएम श्री स्कूलों में तब्दील करना शुरू कर दिया है। इन स्कूलों के बोर्ड भी सीबीएसई बना दिए गए हैं, बावजूद इसके खिलाड़ियों को प्रतिभा निखारने के लिए खेल संसाधनों की कमी सता रही है। खिलाड़ियों का कहना है कि उन्हें यदि खेल संसाधन अच्छे मिल जाए तो वह अपना बेहतर भविष्य बना सकते हैं लेकिन स्कूलों में उन्हें खेल सुविधा नहीं मिल पा रहीं हैं।
वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दुराना
पीएम श्री वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दुराना 6:30 एकड़ क्षेत्र में फैला है। यहां के विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं में भी सहभागिता निभाई है। जिला स्तरीय 100 मीटर की दौड़ प्रतियोगिता में 2024-25 में सोनाक्षी ने स्वर्ण पदक हासिल किया था। नितिन ने लंबी कूद प्रतियोगिता में स्वर्ण तथा गोला फेंक प्रतियोगिता में अंजलि ने भी स्वर्ण पदक हासिल किया था लेकिन इनके पास खेलों से संबंधित सामान का अभाव है। स्कूल में 17 पीजीटी अध्यापक हैं। इनमें एक हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत, चार अध्यापक टीजीटी तथा वोकेशनल के दो अध्यापक हैं। सरकार ने इस स्कूल को पीएम श्री का तमगा तो दे दिया, लेकिन बायोलॉजी, फिजिक्स, इंग्लिश व पंजाबी जैसे विषय के पद अभी भी खाली पड़े हैं। रात की ड्यूटी करने के लिए चौकीदार का भी अभाव है हालांकि स्कूल में सीसीटीवी कैमरे उपलब्ध हैं।
राजकीय उच्च विद्यालय धनयौडा
धनयौडा गांव के राजकीय उच्च विद्यालय में वर्तमान में 77 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। करीब 2 एकड़ में फैले इस स्कूल में पिछले साल केशव व हरभजन ने जिला स्तर की कुश्ती प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया था। स्कूल के बच्चों का रुझान कुश्ती की ओर इसलिए है क्योंकि गांव में पहले से ही पूर्व सरपंच हरपाल सिंह हनुमान अखाड़ा चलाते हैं। यहां अन्य खेल प्रतियोगिताओं का सामान भी न के बराबर है। 6 अध्यापकों के भरोसे यह है स्कूल चल रहा है। स्कूल में सोशल साइंस और ड्राइंग विषय के अध्यापक नहीं हैं। स्कूल में खेल मैदान सहित शौचालयों की हालत काफी दयनीय है।
राजकीय उच्च विद्यालय ठरवा
ठरवा गांव का राजकीय उच्च विद्यालय 1936 में बना था। 91 साल पूरे होने के बावजूद भी इसकी स्थिति सभी स्कूलों से बदहाल है। स्कूल के कई कमरे खंडहर बने हुए हैं। करीब चार एकड़ में फैले स्कूल में 150 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल में खेल के मैदान का बुरा हाल है। स्कूल में गणित, हिंदी, पंजाबी, ड्राइंग विषयों के अध्यापक नहीं हैं। बच्चों ने बताया कि वह खेल प्रतियोगिताओं में अन्य राज्यों तक जाना चाहते हैं लेकिन उनके पास ना तो सही खेल का मैदान है और न ही संसाधन है।
अंबाला सिटी के अधीन दुराना स्कूल के मैदान की दयनीय हालत। संवाद
अंबाला सिटी के अधीन दुराना स्कूल के मैदान की दयनीय हालत। संवाद