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शुभ कर्मों में डुबकी लगाकर ईश्वर प्राप्ति का मार्ग करें प्रशस्त

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नारायणगढ़। गांव नन्हेड़ा के सामुदायिक केंद्र में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन पुष्प मुरारी बापू ने प्रवचन सुनाए। उन्होंने कहा कि सद्गुरु की सेवा कर ईश्वर प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करने के लिए शुभ कर्मों में डुबकी लगाने का प्रयास करना होगा। गुरु तो ईश्वर प्राप्ति का रास्ता बताते हैं, अपने मन कर्म और वचन से गुरु ज्ञान अर्जित करना चाहिए। इसके पश्चात पुष्प मुरारी बापू ने धुंधकारी और गौकर्ण के जीवन चरित्र का मार्मिक प्रसंग सुनाया।
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उन्होंने कहा कि उनकी माता धुंधली के पास कोई संतान नहीं थी। संयोगवश एक ऋषि उनके यहां आए तो माता धुंधली ने व्यथा सुनाते हुए उनसे संतान प्राप्ति की प्रार्थना की। ऋषि ने उन्हें दो पुत्रों का आशीर्वाद देते हुए उन्हें एक फल दिया। ऋषि फल को यथासमय खाने को कह कर चले गए। धुंधली ने उस फल को अपनी गाय को खिला दिया। अपने समय पर धुंधली को पुत्र की प्राप्ति हुई, जिसका नाम धुंधकारी रखा। उसी समय घर में पल रही गाय को बच्चा पैदा हुआ। ऋषि के आशीर्वाद से उसका मुंह मानव का और शेष भाग गाय का था। उसका नाम गौकर्ण रखा गया।
जन्म से ही गौकर्ण सद्कर्मों में लग गया, लेकिन धुंधकारी राक्षस प्रवृति का होता गया। धुंधकारी अपनी माता को मारता पीटता और उसे हमेशा अपने पुत्र के ताने सुनने पड़ते। वह अपनी माता के सामने ही सूरापान करता। परस्त्री गमन करता और वह बुराइयों का दास बन गया। धुंधकारी की माता यह सहन न कर सकी और मृत्यु को प्राप्त हो गई। इसके बाद धुंधकारी कुचरित्र हो गया, वैश्याओ के साथ रहने लगा। एक दिन लालच वश वेश्याओं ने उसे जहर देकर मार डाला और उसकी संपत्ति हड़प ली। वह मर कर प्रेत योनि में प्रवेश कर गया। इस तरह पुष्प मुुरारी बापू ने पूरी कथा सुनाई।
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