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बारिश में भीगा धान, इंतजाम के दावे धवस्त

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झमाझम बारिश के दौरान जिलाभर की अनाज मंडियों में खुले में पड़ा धान भीग गया। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों की तमाम दावे भी धुलते हुए दिखाई दिए। स्थिति यह थी कि किसानों ने धान के भीगने का कारण अधूरी तैयारियां बताते हुए रोष जताया। बताया जाता है कि एक लाख मीट्रिक टन धान भीग गया है। उधर, अंबाला सिटी अनाज मंडी में खुले आसमान के नीचे पड़े हजारों धान के बैग बारिश में भीग गए। वहीं कुुछ किसानों की धान भी पानी में बह गई। बावजूद तेज बारिश में भीग चुके हजारों बैग की जिम्मेदारी कोई भी लेने को तैयार नहीं है। आढ़तियों की मानें तो धान की खरीद होने पश्चात भराई के बाद वह धान संबंधित एजेंसी की हो जाती है। जिसका समय पर उठान करने की जिम्मेदारी संबंधित खरीदार एजेंसी की होती है, वहीं हैफेड व मार्केट कमेटी प्रशासनिक आला अधिकारियों की माने तो खरीदे गए धान के बैग की 72 घंटे तक उठान न होने की स्थिति में आढ़ती की ओर से उसका पूरा रख रखाव रखा जाता है। बारिश के दौरान धान के बैगों पर तरपाल आदि डालने की जिम्मेदारी भी आढ़तियों की ही होती है। कहीं न कहीं आढ़ती इससे बचते हुए दिखाई दे रहे हैं। बता दें कि मंगलवार तड़के करीब एक बजे हुई तेज मूसलाधार बारिश ने अंबाला सिटी की अनाज मंडी में हजारों बैग जोकि खुले आसमान के नीचे पड़े थे उनका भीगा दिया। करीब 4 घंटे तक रूक रूककर बारिश चलती रही, मगर कुछ एक धान के ढेरों को छोड़कर ज्यादातर धान के बैग बारिश में भीग गए, लेकिन कोई बारिश में हुए नुकसान की जिम्मेदारी लेने को कोई भी तैयार नहीं है।
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24 घंटे तक तुलाई व भराई की गई धान को उठाने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की होती है, लेकिन बारिश के दौरान आने वाली परेशानियों के चलते हमारी ओर से पुख्ता इंतजाम किए हुए थे। दुकान पर पड़े सभी बैग तरपाल से ढककर रखे हुए थे। जिस वजह से हमारा कोई भी नुकसान बारिश की वजह से नहीं हुआ है।
असीम अग्रवाल, आढ़ती अनाज मंडी अंबाला सिटी।
मौसम खराब होने के मामले में संबंधित एजेंसी व आढ़तियों को आपसी तालमेल कर भराई की गई फसल का रखरखाव बेहतर ढंग से करना चाहिए। यदि किसान की फसल बाहर खुल आसमान के नीचे है तो उसको बारिश आदि से बचाने की जिम्मेदारी आढ़तियों को निभानी चाहिए, ताकि किसी भी किसान का नुकसान न हो सके।
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गुरचरण सिंह, किसान।
कुछ किसानों की धान की ढेरियां शेड से बाहर खुले में पड़ी हुई थी, मगर अचानक तेज बारिश होने के कारण कुछ किसानों की ढेरियों पर काबू तो पाया गया, लेकिन इस दौरान कुछ धान तेज बारिश में बह गई। मौसम खराब होने की स्थिति में पुख्ता इंतजाम होना बहुत जरूरी है।
दर्शन सिंह, किसान।
जब तक धान की फसल की लिफ्टिंग नहीं होती उस समय तक धान का रखरखाव करना आढ़तियों की जिम्मेदारी होती है, लेकिन हैैफेड एजेंसी की ओर से खरीदी गई धान की 80 प्रतिशत उठान किया जा चुका है। कुछ जो शेष रह गई है वह धान मंडी शैड के नीचे लगी हुई है। मंगलवार को हुई बारिश से अपनी एजेंसी का कोई भी नुकसान नहीं हुआ है।
गुरविंद्र कौर, सीनियर मैनेजर हैफेड, अंबाला सिटी।
खरीदी गई धान के रखरखाव के बेहतर करने के लिए समय- समय पर आढ़तियों को सूचना की जाती है कि मौसम को देखते हुए अपने पास हर प्रकार के पुख्ता इंतजाम को दुरुस्त रखा जाए, ताकि धान की फसलों को किसी प्रकार से नुकसान न हो सके, वहीं मंडी में हुए जमा बरसाती पानी को निकालने के लिए दिनभर सफाई कर्मचारी लगाए गए थे, जहां कर्मचारियों ने नालों की सफाई आदि कर बरसाती पानी को मंडी से बाहर निकाल दिया है।
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-दिलेर सिंह, सेकेटरी मार्केट कमेटी, अंबाला सिटी।
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