माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। शहर के ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित डीएवी कॉलेज (लाहौर) में ऐतिहासिक खजाना मिला है। दरअसल, 140 साल पहले 1886 में पाकिस्तान के लाहौर से शुरू हुआ डीएवी कॉलेज वर्ष 1947 में विभाजन के बाद अंबाला स्थानांतरित हो गया था।
स्थानांतरण के समय विद्यार्थी, प्रबंधन और शिक्षक पाकिस्तान से अपने साथ पुराना सामान भी लाए थे। यह सामान दशकों तक कॉलेज में सुरक्षित रखा रहा। हाल ही में कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. रमेश परमार ने इतिहास प्राध्यापक सहित अन्य प्राध्यापकों की कमेटी बनाकर सामान को निकलवाया तो कई ऐसी बेशकीमती चीजें मिलीं। इनका ऐतिहासिक और अकादमिक महत्व बेहद खास है।
इन ऐतिहासिक वस्तुओं में साल 1833 की दुर्लभ किताबें, आजादी से पूर्व का लकड़ी का फर्नीचर और दशकों पुराने विंटेज वैज्ञानिक उपकरण शामिल हैं। अब कॉलेज इन धरोहरों को सहेजने के लिए एक विशेष संग्रहालय बनाना चाहता है।
गठित की गई थी 10 सदस्यीय समिति : कॉलेज प्रशासन द्वारा विभिन्न विभागों में पड़े सामान से हेरिटेज सामान को तलाशने के लिए एक 10 सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। डॉ. रेखा शर्मा को इस समिति का कन्वेनर बनाया गया था, जबकि डॉ. चांद सिंह, डॉ. भूपिंदर सिंह, डॉ. जसमेर सिंह और डॉ. प्रियंका चौधरी सहित अन्य सदस्य इसमें शामिल थे। जब समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी, तो उसमें धरोहर श्रेणी के इस बड़े खजाने का खुलासा हुआ।
निरीक्षण के दौरान मिलीं ये प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरें : कॉलेज की पुरानी किताबों की सूची में विज्ञान, गणित और दर्शनशास्त्र की कई नायाब किताबें मिली हैं, इनमें सबसे पुरानी पुस्तक 1833 की एनालिटिकल ज्योमेट्री है, इसके अलावा 1851 की गणित की किताब और 1862 की मैसेंजर ऑफ मैथ भी सुरक्षित मिली हैं।