अंबाला सिटी। कोरोनाकाल में 18 माह बाद पहली से तीसरी कक्षा के छात्रों के लिए स्कूल के दरवाजे खोल दिए गए हैं। पहले ही दिन जिले के 475 प्राथमिक स्कूलों में कुल 5 हजार 83 बच्चों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। छात्रों का उत्साह देखकर स्कूल शिक्षक भी गदगद हो गए। क्योंकि किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि पहले दिन इतने अधिक छात्र सरकारी नियमों का पालन करते हुए स्कूल पहुंचेंगे।
स्कूल में प्रवेश से पहले प्रत्येक छात्र की थर्मल स्कैनिंग की गई। जिन छात्रों के पास मास्क नहीं थे उन्हें मास्क वितरित किए गए। साथ ही शिक्षकों ने अभिभावकों द्वारा दिए गए अनुमति पत्र को भी जांचा। जिन छात्रों के पास अभिभावकों द्वारा दिया गया अनुमति पत्र था। केवल उन्हीं छात्रों को ही स्कूल में प्रवेश दिया गया। वहीं, जिन बच्चों के अभिभावक उनके साथ आए थे, लेकिन उन्होंने अनुमति पत्र नहीं दिया था। उनसे सामने बैठकर ही अनुमति पत्र लिखवाया गया। शिक्षकों द्वारा उम्मीद जताई जा रही है एक सप्ताह के अंदर बच्चों की संख्या में और अधिक बढ़ोत्तरी होगी।
पहले दिन अधिकारियों ने किया स्कूल का निरीक्षण
राजकीय स्कूल प्रेमनगर में बीईओ मनजीत कौर ने स्कूल का निरीक्षण किया। साथ ही छात्रों ने सभी सवाल किए और व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने शिक्षकों को सभी कोरोना नियमों का ऐसे ही पालन करते रहने के लिए कहा। इस दौरान उन्होंने अन्य स्कूलों का भी जायजा लेते हुए वहां की व्यवस्थाएं जांची और जिन स्कूलों में थोड़ी कमी लगी उन स्कूल प्राचार्यों को जरूरी दिशा निर्देश जारी किए गए।
छात्रों की संख्या बढ़ने से टूट सकते हैं कोरोना नियम
इस बार छात्रों की संख्या काफी बढ़ गई है, लेकिन बहुत से ऐसे स्कूल हैं जहां पर छात्रों की संख्या तो अधिक है, लेकिन स्कूल के पास बच्चों को बिठाने के लिए कक्षाएं कम हैं। ऐसे में अगर एक सप्ताह में छात्रों की संख्या बढ़ती है तो कोरोना नियमों का टूटना तय है। क्योंकि शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार एक बेंच पर एक ही छात्र को बिठाया जाना है लेकिन कक्षाएं कम होने के कारण स्कूल प्राध्यापकों के लिए भी कोरोना नियमों का पालन करवाना चुनौतीपूर्ण होना तय है।
पहले दिन जिले के 475 स्कूलों में 5 हजार 83 छात्र स्कूल पहुंचे थे। अन्य कक्षाओं के मुकाबले पहले दिन की यह स्थिति काफी ठीक है। सभी स्कूलों में कोरोना नियमों का पालन भी हुआ है। मेरा प्रयास रहेगा कि आगामी दिनों में स्कूलों का औचक निरीक्षण करते हुए व्यवस्थाओं की जांच कर सकूं।
- अनूप, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, अंबाला।