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तीन माह से वेतन नहीं, दोबारा मंत्री विज से मिले कच्चे कर्मचारी, बोले- अब तो उधार भी नहीं मिलता राशन

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तीन माह से वेतन नहीं, दोबारा मंत्री विज से मिले कच्चे कर्मचारी, बोले- अब तो उधार भी नहीं मिलता राशन
नागरिक अस्पताल में दिया धरना, गृहमंत्री को भी दिया था 15 दिन पहले ज्ञापन, फिर भी नहीं जारी हुआ कर्मचारियों का मेहनताना
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। कोरोना काल में दिन-रात ड्यूटी पर मुस्तैद रहकर नागरिक अस्पताल के कच्चे कर्मचारियों ने जान की परवाह न करते हुए सेवाएं दीं, अब उन्हीं 225 वार्ड ब्वॉय व सफाई कर्मचारियों को वेतन के ठोकरें खानी पड़ रही हैं। तीन महीने तक वेतन नहीं मिलने से परेशान कच्चे कर्मचारी दोबारा से गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के दर पर पहुंचे और वेतन देने के गुहार लगाई। कर्मचारियों ने दुखड़ा रोते हुए कहा कि मंत्री जी अब तो उधार पर दुकानदारों ने राशन देना भी बंद कर दिया है। परिवार कैसे चलाएं? मंत्री विज ने जल्द वेतन दिलाने का आश्वासन दिया। जिसके बाद कर्मचारियों ने जिला नागरिक अस्पताल में धरना शुरू कर दिया। यहां सर्व कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने वेतन न जारी करने को लेकर सरकार, स्वास्थ्य विभाग व ठेकेदार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। बता दें कि करीब 15 दिन पहले भी कर्मचारियों ने गृहमंत्री को ज्ञापन देकर वेतन दिलाने की गुहार लगाई थी।
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जब तक वेतन नहीं तब तक काम नहीं....
आर्थिक तंगी से जूझ रहे कर्मचारियों ने कहा कि जब तक ठेकेदार हमें हमारा तीन महीने का वेतन जारी नहीं करता तब तक कोई भी कर्मचारी काम पर नहीं लौटेगा। हमें तीन महीनों से वेतन क्यों नहीं जारी किया गया? इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है। कर्मचारियों ने दुखड़ा रोते हुए बताया कि बच्चों के स्कूलों से भी फीस को लेकर कहा जाने लगा है। ऊपर से घर के अन्य खर्च बिना वेतन के कैसे करेंगे। वेतन की मांग कर रहे आउट सोर्सिंग कर्मचारियों के समर्थन में सर्व कर्मचारी संघ भी आ गया है। सर्व कर्मचारी संघ के महासचिव महावीर पाई ने कहा कि ठेकेदार व स्वास्थ्य विभाग इन कर्मचारियों का शोषण करना बंद करे और जल्द से जल्द सभी कर्मचारियों का वेतन जारी करे।
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तीन महीने से वेतन नहीं दिया। 14 जुलाई को दो दिन में वेतन दिलाने का आश्वासन मंत्री ने दिया था, लेकिन आज 15 दिन बीत चुके हैं। स्थिति जस की तस है।
हरप्रीत सिंह।
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ठेकेदार और अस्पताल प्रबंधन ने कुछ कर्मचारियों को निकाल दिया है। इनमें से एक लड़के ने आत्महत्या का प्रयास भी किया, क्योंकि सभी बेहद तंग आ चुके हैं।
मनीष कुमार।
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वेतन को कहते हैं तो हमें बाहर करने की धमकी देते हैं। इसीलिए हम अभी तक चुप थे, लेकिन अब कब तक चुप रहें। परिवार भी चलाना की जिम्मेदारी हमारी ही है।
अमित।
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सोमवार को हम कुछ अधिकारियों के पास गए थे। उन्होंने हमें बताया कि पैसा ठेकेदार के खाते में डाल दिया गया है, लेकिन हमें तो अभी भी वेतन नहीं मिला है।
राहुल।
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शुरुआत में जिन्हें वार्ड ब्वॉय रखा था, अब उन्हें बदलकर स्वीपर लगा दिया है। मनमर्जी से पोस्ट बदल दी हैं। इसके बावजूद किसी को वेतन नहीं दिया गया।
मनीष
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