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धार्मिक समागम में सुनाई शहादत गाथा

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धार्मिक प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित करते प्रधान सुदर्शन सिंह सहगल। - फोटो : Ambala
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40 मुक्तों की शहादत को नमन करते हुए शुक्रवार को गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा गोबिंद नगर में धार्मिक समागम का आयोजन किया गया। हजूरी रागी भाई रणधीर सिंह ने इलाहीबाणी के जाप से संगत को निहाल किया। समागम की समाप्ति पर खिचड़ी, दही व छोले का अटूट लंगर बांटा गया। गुरुद्वारा के प्रधान सुदर्शन सिंह सहगल ने बताया कि प्रत्येक वर्ष मुक्तसर साहिब के 40 शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए गुरुद्वारा परिसर में विशेष समागम का आयोजन किया जाता है।
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इस मौके पर उन प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया जो श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के प्रकाश पर्व पर आयोजित धार्मिक प्रतियोगिता में पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे थे। इसमें तीन ग्रुप के प्रतिभागी शामिल रहे। सात वर्ष तक के ग्रुप में उपरहत कौर ने पहला, हरसिमर सिंह ने दूसरा और अगमजोत सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया। सात वर्ष से 12 वर्ष के दूसरे ग्रुप में कनवीर सिंह ने पहला, गुर आशीष सिंह ने दूसरा और भव करण सिंह तीसरे स्थान पर रहे। 12 वर्ष से अधिक उम्र के ग्रुप में हरलीन कौर ने पहला, मनवीर सिंह ने दूसरा और किरनदीप कौर ने तीसरा स्थान हासिल किया। सभी विजेताओं को गुरुद्वारा प्रधान सुदर्शन सिंह सहगल द्वारा सिरोपा पहनाकर व शील्ड देकर सम्मानित किया गया।
40 मुक्तों का इतिहास
सिख इतिहास के अनुसार भाई महा सिंह की अध्यक्षता में 40 सिख आनंदपुर के किले पर डेरा डालते समय श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज को बेदावा (पत्र) लिखकर दे आए थे। उन्होंने कहा था कि आप हमारे गुरु नहीं और हम आपके सिख नहीं हैं। यह कहकर वे अपने घर गए तो माता भाग कौर जी ने उन्हें चूड़ियां भेंट की। उन्होंने कहा कि वह गुरु जी के साथ जंग में जा रही हैं। माता भाग कौर वस्त्र व शस्त्र धारण कर गुरु जी के साथ आ गईं। इसके बाद 40 सिखों को अपनी गलती का अहसास हुआ। यह 40 सिख बाद में 21 वैसाख 1705 को मुक्तसर (जिसे पहले खिदराने के नाम से जाना जाता था) में आए। उन्होंने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के साथ मिलकर जालिम मुगल हुकूमत के विरुद्ध जंग लड़ी व शहीदी प्राप्त की। इसी जगह पर बेदावा देकर आए भाई महा सिंह व उनके साथियों का श्री गुरु गोबिंद सिंह ने बेदावा फाड़ा व उन्हें सिख धर्म में शामिल किया। इस जगह को टूटी गंढी साहिब के नाम से जाना जाता है। यहीं 40 शहीद सिखों का अंतिम संस्कार श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज ने अपने हाथों से किया था। जिस जगह पर 40 सिखों का संस्कार किया गया, उस जगह को गुरुद्वारा अंगीठा साहिब के नाम से और उन सिखों को 40 मुक्तों के नाम से जाना जाता है।
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