इंडो-पाक युद्ध में देश के लिए अपनी जान गवां देने वाले महावीर चक्र
विजेता शहीद मेजर विजय रत्न चौधरी की शहादत पर अंबाला कैंट में सियासत
शुरू हो गई है।
लोकल मिलिटरी अथॉरिटी और कैंट विधायक अनिल विज आमने-सामने
हो गए हैं। सेना मेजर विजय रत्न चौक का कायाकल्प कर इसे शहीद मेजर विजय
रत्न स्मारक बनाना चाहती है। चौक पर शहीद की प्रतिमा और तिरंगा लगाना चाहती
है। चौक कई साल से बदहाल पड़ा है जिस कारण लोकल मिलिटरी अथॉरिटी ने फैसला
लिया है कि इस चौक को पूरी तरह से शहीद की शहादत को समर्पित कर दिया जाए।
इसीलिए भड़क रही भाजपा
सेना
ने अपने प्रपोजल पर डीसी अंबाला से अनुमति लेने के बाद चौक का कायाकल्प
करना शुरू कर दिया है और चौक पर लगा भाजपा का झंडा उतार दिया है। सेना अब
यहां शहीद की प्रतिमा, आकर्षक पत्थर पर मेजर की शहादत की कहानी और साथ में
तिरंगा झंडा लगाना चाहती है लेकिन भाजपा को शहीद की शहादत के स्मारक की
चिंता कम अपने उखड़े झंडे की ज्यादा चिंता सता रही है जिसे लेकर कैंट भाजपा
ने सेना के साथ नया विवाद मोल ले लिया है। भाजपा नेता कहते हैं कि सेना को
झंडा उखाड़ने से पहले कम से कम पार्टी के स्थानीय नेताओं को सूचित करना
चाहिए था। बिना सूचना दिए झंडा कैसे उतार दिया?
झंडे को लेकर विधायक विज अड़े
इस
बड़े विवाद को देखते हुए सेना के कर्नल आरडी मोदगिल ने शुक्रवार को
रेस्टहाउस में कैंट विधायक अनिल विज से मुलाकात की। विधायक को कर्नल ने
सेना के शहीद स्मारक की प्लानिंग के बारे में समझाया और उनसे सहयोग की
दरकार की। विज ने सेना के इस प्रोजेक्ट की सराहना की लेकिन झंडा हटाने की
बात पर वे अड़ गए। उन्होंने कर्नल को बताया कि प्रशासन की ओर से यह चौक
लावारिस है लेकिन भाजपा इस चौक की साल में दो बार पुताई करवाती है और
गणतंत्र व स्वतंत्र दिवस मनाती है। बाकायदा तिरंगा लहराया जाता है और बाद
में भाजपा अपना ध्वज लहराती है। विज ने कहा कि सेना इस चौक की कायाकल्प
करे, लेकिन चौक के बगल में भाजपा का झंडा जरूर लहराएगा। इस पर कर्नल मोदगील
ने कहा कि वे आला अफसरों से बातचीत कर इस बात का जवाब देंगे। इस मौके पर
रेस्टहाउस में कई भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
भाजपा बिना वजह
विवाद को तूल देकर शहीदों की शहादत का अपमान कर रही है। सेना यदि चौक को
शहीद को समर्पित करना चाहती है तो भाजपा को बीच में रोड़ा नहीं अटकाना
चाहिए। भाजपा क्या शहीदों का सम्मान करना भी भूल गई है?
रमेश लाल मल, मेयर, एमसीए, कांग्रेस नेता
मेरे
ख्याल से भाजपा को इस तरह का विवाद पैदा नहीं करना चाहिए। यदि चौक को सेना
संवारना चाहती है तो विधायक विज क्यों इस विवाद को तूल देने में लगे हैं।
पार्टी अपना तिरंगा कहीं ओर लगा ले, इससे क्या फर्क पड़ता है।
नीलम शर्मा, कांग्रेस नेता
एक्सपर्ट व्यू
शहीद
देश की संपत्ति होते हैं। उनकी शहादत को देखकर ही अन्य जवानों में जोश भर
जाता है। मेजर विजय रत्न चौक पर अब तक शहीद की कोई प्रतिमा नहीं है इसीलिए
कोई राजनीतिक पार्टी झंडा लहराए कोई दिक्कत नहीं लेकिन यदि चौक पर शहीद
मेजर विजय की प्रतिमा लगती है, तो किसी भी राजनीतिक पार्टी का झंडा वहां
नहीं लगना चाहिए। यदि झंडा लगता है तो चौक पर किसी शहीद की प्रतिमा न लगाई
जाए। यह सेना और संबंधित राजनीतिक पार्टी को तय करना है। शहीद की प्रतिमा
के ऊपर सिर्फ तिरंगा ही लहरा सकता है न की किसी राजनीतिक पार्टी का झंडा।
खुशबीर दत्त, जनरल सेक्रेटरी, एक्स सर्विसमैन वेलफेयर कमेटी व एयरफोर्स रिटायर्ड
आपरेशन ‘कैकटस लिली’ में शहीद हुए थे विजय
विजय
रत्न चौधरी का जन्म अंबाला में 9 जुलाई, 1939 को हुआ था। उनके पिता का नाम
डॉक्टर एमडी चौधरी था। उनका पैतृक शहर पंजाब पाकिस्तान के कंजरूर में है
लेकिन मेजर विजय अंबाला में ही पैदा हुए। उन्होंने अपनी पढ़ाई सनावर के
लारेंस स्कूल से पूरी की। 14 दिसंबर, 1958 को उन्होंने आर्मी ज्वाइन की।
इसके बाद वे मेजर विजय रत्न चौधरी बन गए। आर्मी ज्वाइन करने के बाद विजय ने
कॉलेज ऑफ मिलिटरी इंजीनियरिंग पुणे से 1962 में इंजीनियरिंग की डिग्री
हासिल की। वे सेना की मद्रास इंजीनियरिंग ग्रुप की 9 इंजीनियरिंग रेजीमेंट
में तैनात थे। माइंस फील्ड एरिया को क्लीयर करके सेफ लेन बनाने में मेजर
बहुत माहिर थे। 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान उनके नेतृत्व में
पाकिस्तान बार्डर पर चक्रा इलाके में सेना लगातार आगे बढ़ रही थी। इंडियन
आर्मी दुश्मन की चक्रा पोस्ट को अपनी अधीन करना चाहती थी।
इसके लिए
पाकिस्तानी सेना द्वारा बिछाई माइंस फील्ड एरिया (माइन बिछा क्षेत्र) को
पार करके दूसरी ओर पहुंचकर चक्रा पोस्ट पर कब्जा करना था। अब चैलेंज यह था
कि जवानों के लिए सुरक्षित रास्ता कैसे बनाया जाए। मेजर विजय रत्न चौधरी ने
चैलेंज स्वीकार किया और उन्होंने माइंस फील्ड एरिया में घुसकर जवानों के
सुरक्षित रास्ता ढूंढा। इसके बाद सेना ने चक्रा पोस्ट पर कब्जा कर लिया।
इसी तरह उन्होंने सांबा सेक्टर, ठाकुरद्वारा, लुहारा, बसंतर रीवर जैसे
माइंस फील्ड एरिया में भी अपना कमाल दिखाया लेकिन बसंतर रीवर इलाके में जब
वह आपरेशन ‘कैकटस लिली’ को लीड करते हुए माइंस फील्ड एरिया में सेफ लेन की
तलाश कर रहे थे तो 11 दिसंबर, 1971 को वह शहीद हो गए। उनकी बहादुरी के लिए
मरणोपरांत उन्हें महावीर चक्र से नवाजा गया।