अंबाला सिटी। विधानसभा चुनाव नजदीक हैं इसीलिए अब सरकार ने फिर से अवैध कॉलोनियों को वैध करने का राग छेड़ दिया है। इसके लिए सभी नगर निगमों के उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे 1 जनवरी, 2014 को आधार मानकर नगर निगम के दायरे में शामिल हुईं उन नई कॉलोनियों की सूची सरकार को भेजें, जो 50 फीसदी से ज्यादा डेवलप हो चुकी हैं।
इसके बाद इन कॉलोनियों को वैध घोषित करने पर विचार किया जाएगा। मंगलवार को होने वाली म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला (एमसीए) की सदन की बैठक में अवैध कॉलोनियों के मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। इसके बाद लिस्ट सरकार को भेज दी जाएगी।
अवैध का दंश झेल रहीं कॉलोनियां
17 मार्च, 2010 को शहर व छावनी नगर परिषद को मर्ज कर सरकार ने म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला (एमसीए) का गठन किया। एमसीए की हदें बढ़ीं तो अंबाला कैंट दायरे में 17 गांवों की 135 अवैध कॉलोनियों शामिल हुई, जबकि अंबाला सिटी दायरे में 12 गांवों की 75 अवैध कॉलोनियां शामिल हुईं। कुल मिलाकर एमसीए के दायरे में 210 अवैध कॉलोनियां शामिल हुईं। आज तक ये कॉलोनियां अवैध हैं। इनमें से बहुत ही 50 फीसदी से ज्यादा विकसित हो चुकी हैं।
कॉमन कंपाउंड पॉलिसी से मिल रही सुविधा
अंबाला की 210 कॉलोनियां तो अवैध ही हैं, मगर 95 कॉलोनियों के लोगों को सरकार की कॉमन कंपाउंड पॉलिसी के तहत कुछ राहत जरूर मिल रही है। इस पॉलिसी के तहत सरकार ने अंबाला की 210 में से उन 95 कॉलोनियों को मूलभूत सुविधाएं देने के निर्देश दिए थे, जो 50 फीसदी से ज्यादा डेवलप हैं। इन कॉलोनियों में एमसीए से एनओसी जारी होने के बाद लोग मकानों की रजिस्ट्री भी करवा सकते हैं लेकिन इन 95 कॉलोनियों के माथे पर अवैध का कलंक आज भी बरकरार है।
लोग बोले-राजनीति बंद करो, राहत दो
बीस से ज्यादा साल से हम अपनी कॉलोनी में रह रहे हैं, लेकिन कॉलोनी आज भी अवैध है। सरकार चुनावी स्टंट बंद करे। ठीक ढंग से यदि कॉलोनियों को नियमित करना है तो करे। जनता को बेवकूफ क्यों बनाया जा रहा है।
विकास कुमार, निवासी, कैंट
जल्द कॉलोनियां नियमित होंगी, ये सुनते-सुनते कई साल बीत गए। मुझे लगता है कि हमारे पार्षद भी कभी इस बात को प्रमुखता से नहीं उठाते। एमसीए की बैठकें यूं ही हंगामे की भेंट चढ़ जाती हैं। कम से कम ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर तो एकमत से चर्चा हो।
सर्वेश सिंह, निवासी, कैंट
पहले एमसीए में पार्षद नहीं थे, तो हमारी अवैध कॉलोनियों की समस्या की ठीक से पैरवी नहीं हो पाती थी। अब कम से कम पार्षद तो इस मुद्दे को उठाएं। क्या पता चुनाव के दबाव में आकर सरकार कॉलोनियों को नियमित करें दे।
संतोष रानी, निवासी, सिटी
मुझे तो समझ नहीं आता, सरकार चाहती क्या है। सभी लोग तो सरकार के अप्रूव फ्लैटों व कॉलोनियों में इतने महंगे दामों पर तो जमीन या फ्लैट खरीद नहीं सकते। जैसे-तैसे सालों पहले शहर से आउटर कॉलोनियों में जमीन लेकर आशियाने बनाए तो उसे सरकार अवैध कहती है।
सुषमा शर्मा, निवासी, सिटी