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महाआरती, जलाभिषेक के बाद भगवान वामन का प्रस्थान, हिंडोलों को उठाने की बेताबी

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उतर भारत में प्रख्यात भगवान वामन द्वादशी मेला शुक्रवार को संपन्न हो गया। तीन दिवसीय मेले के अंतिम दिन देररात महाआरती, नवरंग राय तालाब के जलाभिषेक के बाद भगवान वामन के पांचों हिंडोलों को विभिन्न मंदिरों में प्रस्थान करवाया गया। इस बार परंपरा टूटी और भगवान वामन के हिंडोलों का जल विहार नहीं हो सका। मगर देररात होने वाली भव्य महा आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिरकत कर भगवान वामन के जयकारों से माहौल को अध्यात्मिक बनाए रखा।
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सनातन धर्म सभा के सचिव विनोद गर्ग ने बताया कि इस बार परंपरा को पूरा करने के लिए सनातन धर्म सभा द्वारा जल अभिषेक करते हुए परंपरा को पूर्ण करने का निर्णय लिया। उनके अनुसार मेला बहुत भव्य रहा और विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने इस मेले में भाग लिया।
उधर, मेले के अंतिम दिन आलम यह था कि हरि बोल...हरि बोल... के जयकारों से अंबाला के बाजार गूंज उठे। हर तरफ भगवान वामन के नाम के जयकारे और बैंड बाजों पर अध्यात्मिक धुने सुनाई दे रही थीं। इस दौरान शहर की पुरानी अनाज मंडी से लेकर तंदूरा बाजार, कोतवाली बाजार, सर्राफा बाजार में खूब रौनकें रही। नवरंगराय तालाब के पास भी भव्य मेला सजाया गया था।
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यहां शाम को पांच बजे से देर रात तक कीर्तन जारी रहा। पुरानी अनाज मंडी में भी सुबह 8 बजे से लेकर 12 बजे तक भजन मंडली ने भजनों का गुणगान करते हुए भगवान की लीलाओं का वर्णन किया। एक बजे से मेरठ व अंबाला से आए बैंड ने भजनों की प्रस्तुति से सभी को झूमने के लिए मजबूर कर दिया। भक्तों का भी हुजूम भगवान वामन के दर्शन करने के लिए पंडाल में उमड़ा हुआ था। शाम चार बजे विधिविधान के साथ बैंड की धुन पर भगवान वामन की आरती की गई। पूजा पाठ के बाद भक्तों ने भगवान वामन के हिंडोलों को अपने कंधों पर उठाते हुए बैंड की अगुवाई में नवरंग राय तालाब की ओर विशाल शोभायात्रा के रूप में प्रस्थान किया। इस दौरान जगह-जगह भक्तों द्वारा कढ़ी चावल, खीर, छोले कुल्चे, जलजीरा, बिस्कुट व अन्य खाने की वस्तुओं के लंगर लगाए गए थे। जहां पर भक्तों ने भगवान वामन का प्रसाद ग्रहण किया। नवरंग राय तालाब पर पहुंचने तक भक्तों ने भगवान वामन की पूरी विधिविधान के साथ आरती की। अंत में रात करीब साढ़े 11 बजे भगवान वामन का नवरंग राय तालाब के जल से हिंडोलों का जलाभिषेक कर आरती की और फिर हिंडोलों को विश्राम स्थल तक ले जाया गया।
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शोभायात्रा में शामिल हुए चार बैंड व झांकियां
कोविड नियमों के मद्देनजर शोभायात्रा को पहले के मुकाबले छोटा रखा गया था। शोभायात्रा में चार बैंड व कई धार्मिक झांकियां मौजूद थी। इसमें अंबाला समेत मेरठ के बैंड शामिल रहे। इस दौरान भगवान के स्वरूप की मूर्तियों को भी शोभायात्रा में शामिल किया गया। जहां भक्तों ने माथा टेकते हुए भगवान से सुख समृद्धि की कामना की और अगले साल जल्दी आने की प्रार्थना की। वहीं, स्कूली बच्चों ने भी सुरक्षा घेरा बनाते हुए मेले में व्यवस्था बनाए रखी। बैंड की धुनों पर भक्त जन झूमते नजर आए।
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नहीं हुआ जलविहार, जलाभिषेक से पूरी हुई परंपरा
इस बार भगवान वामन की हिंडोलों को जलविहार नहीं करवाया गया। जबकि इस परंपरा को पूरा करने के लिए भगवान वामन को प्रसिद्ध नवरंग राय तालाब के जल से अभिषेक किया गया। वामन द्वादशी मेले को पूर्ण तभी माना जाता है जब नवरंग राय तालाब में भगवान वामन का जलविहार करवाया जाता है। लेकिन नवरंग राय तालाब के अधूरे निर्माण कार्य व कोरोना को देखते हुए इस बार प्रशासन ने जलविहार की अनुमति नहीं दी गई।
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फोटो-46 व 47
भगवान वामन से मांगी मन्नतें, रोशनी से सजा मंदिर
संवाद न्यूज एजेंसी
मुलाना। कस्बा मुलाना में दो दिवसीय वामन द्वादशी मेला धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। दूसरे दिन शुक्रवार शाम को शिवधाम गौरी ताल मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के बाद मेले का समापन किया गया। मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान वामन जी के चरणों में माथा टेककर मन्नतें मांगी। मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था। इसकी शोभा देखते ही बन रही थी। मंदिर में लगाई गई झांकियां मंदिर की शोभा को चार चांद लगा रही थी। झांकियों में शिव परिवार की झांकी अति सुशोभित व मनमोहक रही। मेला प्रारंभ की रस्म मुख्यातिथि समाजसेवी नरेंद्र बिलमा द्वारा रिबन काटकर की गई। वहीं ज्योति प्रज्ज्वलित की रस्म भाजपा जिला महामंत्री कृष्ण राणा ने की। मेले के दौरान मां भगवती के जागरण का आयोजन किया गया। इसमें मनु सिकंदर पार्टी ने भजनों द्वारा समां बांधा। मेले के दौरान मंदिर कमेटी द्वारा की गई आतिशबाजी ने आसमान को रंगीन किया, साथ ही मेले में पंहुचे श्रद्धालुओं का मनमोह लिया। वामन भगवान के जयकारों के साथ आधी रात को मेले का समापन हुआ। बता दें कि कस्बा में शिवधाम गौरी ताल मंदिर कमेटी द्वारा 28 वर्षों से भगवान वामन द्वादशी मेले का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
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