कोरोना संक्रमण फैलाव को से बचाव के लिए जिला प्रशासन ने पूरी तरह से कमर कस ली है। इसके लिए जिला प्रशासन ने साधन और संस्थान भी पूरी तरह से जुटा लिए हैं, ताकि किसी भी आपात परिस्थिति से निपटा जा सके। जिले में ऑक्सीजन और रेमडेसिवर के साथ-साथ बेड की भी व्यापक व्यवस्था है। जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से 966 बेड की व्यवस्था की गई है।
होम आइसोलेटिड मरीजों का घर-घर जाकर हो रहा इलाज
जिले में प्रथम और द्वितीय चरण में लगभग 2 लाख 70 हजार लोगों को टीकाकरण किया जा चुका है। डीसी अशोक कुमार ने बताया कि होम आइसोलेट एप के तहत जिले में अच्छा कार्य किया जा रहा है, लगभग 90 प्रतिशत होम आइसोलेट मरीज हैं। ऐसे मरीजों पर स्वास्थ्य विभाग की पूरी नजर है, वह समय-समय पर उनके घर जाकर उनके स्वास्थ्य की जांच भी कर रही है। ऐसे मरीज अपने आप को अकेला न समझें, इसके लिए उन्होंने स्वयं दूरभाष से ऐसे व्यक्तियों से बातचीत की है और उन्होंने स्वास्थ्य विभाग द्वारा उनकी जांच की जा रही है, इस बारे उन्हें बताया है।
एप के माध्यम से बुक करवा सकते हैं बेड
उपायुक्त ने बताया कि कोरोना संक्रमित होने की दिशा में संबंधित मरीज को बेड के लिए दिक्कत न हों, इसके लिए बेड मैनेजमेंट सिस्टम की व्यवस्था की गई है। एप के माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपनी सुविधा अनुसार बेड को बुक करवा सकता है। यह सुविधा तीन घंटे के लिए उपलब्ध रहेगी। अगर संबंधित व्यक्ति द्वारा कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जाती है तो स्वचालित तरीके से अगले व्यक्ति को यह सुविधा उपलब्ध करवा दी जाएगी।
ठीक हो चुके मरीजों का प्लाज्मा बनेगा संजीवनी
अभी जिले में फिलहाल प्लाज्मा से संबंधित कोई सेंटर नहीं है। लेकिन अब इसकी व्यवस्था की जाएगी। करीब 15550 मरीज अभी तक जिले में कोरोना को मात दे चुके हैं। अब स्वास्थ्य विभाग इन्हीं में से ऐसे स्वयंसेवकों की तलाश करेगा जो स्वेच्छा से प्लाज्मा देने के लिए तैयार हैं। यह प्लाज्मा कोरोना से जिंदगी की जंग लड़ रहे मरीजों के लिए संजीवनी बन सकेगा।