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कार्तिकेय मोर पर सवार होकर ब्रह्मांड की परिक्रमा के लिए निकले :चैतन्य महाराज

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अंबाला सिटी के मोती नगर ​स्थित आश्रम में प्रवचन सुनते श्रद्धालु। प्रवक्ता - फोटो : Archive
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अंबाला सिटी। श्री कबीर आश्रम, नगर खेड़ा, मोती नगर में श्रावणी शिव महापुराण कथा का आयोजन जारी है। कथा के पांचवें दिन व्यासपीठ से आचार्य सनातन चैतन्य महाराज ने शिव-पार्वती पुत्र गणेश और कार्तिकेय के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि माता-पिता की सेवा और उनके चरणों में ही संपूर्ण ब्रह्मांड वास करता है और इसी भाव ने गणेश जी को प्रथम पूजनीय बना दिया।
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कथा के दौरान आचार्य ने बताया कि भगवान कार्तिकेय और गणेश जी के बीच विवाह को लेकर असमंजस की स्थिति उत्पन्न हुई थी। इस पर भगवान शिव ने परीक्षा स्वरूप शर्त रखी कि जो संपूर्ण ब्रह्मांड का चक्कर सबसे पहले लगाएगा, उसका विवाह पहले होगा। शर्त सुनते ही कार्तिकेय मोर पर सवार होकर ब्रह्मांड की परिक्रमा के लिए निकल पड़े।

वहीं, छोटे वाहन चूहे की सवारी वाले गणेश जी ने विवेक का परिचय दिया और माता-पिता (शिव-पार्वती) को एक स्थान पर बैठाकर उनकी परिक्रमा पूरी की। गणेश जी के इस अद्भुत विवेक और भक्तिभाव को देखते हुए सभी देवी-देवताओं की उपस्थिति में उन्हें गणाध्यक्ष एवं प्रथम पूज्यनीय देवता घोषित किया गया। इस घोषणा के बाद कैलाश पर्वत पर आनंद उत्सव मनाया गया। बाद में ब्रह्मांड की परिक्रमा कर लौटे कार्तिकेय जी को जब इसका ज्ञान हुआ, तो वे रुष्ट होकर दक्षिण दिशा में श्री शैल पर्वत की ओर चले गए।
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इस अवसर पर मुख्य यजमान गोयल परिवार, इंदुबाला अरोड़ा, लविश कुमार मोनू और सनातन प्रचार मंडल के सदस्यों समेत काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में पंडित रविंद्र नाथ तिवारी व पंडित देवीप्रसाद भारद्वाज ने मंत्रोच्चारण कर स्वस्ति वाचन किया। कथा के पश्चात भव्य आरती हुई और भक्तों में प्रसाद वितरित किया गया।

अंबाला सिटी के मोती नगर स्थित आश्रम में प्रवचन सुनते श्रद्धालु। प्रवक्ता- फोटो : Archive

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