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ट्रेनों में बढ़ने लगी चोरी और छीनाझपटी की घटनाएं

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ट्रेन संचालन में बढ़ोतरी होते ही चोर व झपटमार भी सक्रिय हो गए हैं। लगभग डेढ़ महीने में छावनी जीआरपी थाने में ट्रेनों में चोरी व झपटमारी के 12 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 3 मामलों के आरोपी पकड़े जा चुके हैं। इसमें हाइप्रोफाइल चोरी का एक मामला भी शामिल था। जिसमें प्रवर्तन निदेशालय जयपुर में तैनात अधिकारी का बैग ट्रेन से चोरी हो गया था। बैग में सरकारी दस्तावेज थे।
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इस मामले को जीआरपी ने दो दिन में ही सुलझा लिया था और आरोपी को बैग सहित काबू किया था। वहीं अन्य मामलों के आरोपी अभी पुलिस गिरफ्त से बाहर चल रहे हैं। लगातार बढ़ रहे चोरी के आंकड़ों ने एक बार फिर ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। वहीं स्टेशन और ट्रेनों की सुरक्षा में तैनात रेलवे सुरक्षा बल आरपीएफ और राजकीय रेलवे पुलिस जीआरपी अपने-अपने स्तर पर आरोपियों की धरपकड़ के प्रयास कर रही हैं, ताकि आगामी घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके।
जीआरपी थाने में दर्ज अधिकांश मामलों के अनुसार ट्रेनें में जो भी चोरी व छीनाझपटी की घटनाएं हुई हैं, उन घटनाओं को रेलवे यार्ड में उस जगह अंजाम दिया गया है, जहां ट्रेन की गति काफी कम होती है। इस बात का फायदा उठाकर ही चोर व झपटमार चलती ट्रेन से कूदकर फरार हो जाते हैं। इसका खामियाजा दूर-दराज क्षेत्रों की तरफ जाने वाले यात्रियों को भुगतना पड़ता है।
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चारों तरफ है खाली जगह
सहारनपुर और दिल्ली की तरफ रेल मार्ग पर रेलवे और दो रिहायशी कॉलोनियां हैं। जब भी ट्रेन धीमी होती है तो आरोपी इस जगह का इस्तेमाल ट्रेन में चढ़ने व उतरने के लिए करते हैं। इसी प्रकार काली पलटन पुल के पास पूरी जगह खाली पड़ी हुई है। यहां भी झपटमार पूरी तरह से सक्रिय रहते हैं, जो मौका मिलते ही घटना को अंजाम देकर चलती ट्रेन से यार्ड में उतरकर गायब हो जाते हैं।
रात 12 बजे से सुबह 5 बजे तक सक्रिय होते हैं चोर
ट्रेनों में सफर करने वाले अधिकांश यात्री रात को सो जाते हैं। इसी का फायदा चोर व झपटमार उठाते हैं। वे रात को 12 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक चोरी या झपटमारी की वारदात को अंजाम देते हैं। जब तक यात्री को चोरी की जानकारी मिलती है, तब तक चोर अपना काम करके ट्रेन से उतरकर फरार हो चुका होता है।
सुरक्षा एजेंसियों की हिदायतें
चोरी व छीनाझपटी की घटनाओं को रोकने के लिए यात्रियों को भी सतर्कता बरतने की हिदायत दी गई है। वे सफर के दौरान रात के समय न तो कोच के दरवाजे खोलें और न ही दरवाजे पर खड़े रहें सोने से पहले अपनी सभी वस्तुएं किसी ऐसी जगह पर रखें, जहां चोरों की नजर न पड़े। अगर जरूरत न हो तो सफर के दौरान कीमती वस्तुएं न लेकर जाएं। वहीं कोच में कोई संदिग्ध व शरारती व्यक्ति नजर आए तो तुरंत इसकी जानकारी टीटीई, सुरक्षा कर्मचारी व रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर दें।
ट्रेनों में होने वाली चोरी व छीनाझपटी की घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे यार्ड में आरपीएफ की विशेष टीम तैनात रहती है। टीम सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई करती है। पिछले कुछ मामलों में टीम को सफलता भी मिली है।
-नितिश शर्मा, वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त, अंबाला।
ट्रेनों में हुई चोरी के अधिकांश मामलों में दूसरे राज्यों से जीरो एफआईआर प्राप्त होती हैं। मामला दर्ज करने के बाद आगामी छानबीन के लिए संबंधित विभागीय कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है जो मोबाइल सर्विलेंस सिस्टम से मामले का सुलझाने में जुटे हुए हैं।
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-धर्मवीर सिंह, प्रभारी जीआरपी।
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