नारायणगढ़ (अंबाला)। बसपा प्रदेश सचिव हरबिलास की मौत के बाद अब उनके चर्चे लोगों की जुबां पर हैं। लोग बताते हैं कि हरबिलास के चाचा दिवंगत मामचंद इनेलो से राजनीति करते थे। उस दौरान चौटाला परिवार से उनके काफी अच्छे रिश्ते थे।
दोनों परिवारों का एक दूसरे के यहां आना-जाना था। इसी से प्रेरित होकर हरबिलास ने भी राजनीति में जाकर लोगों की सेवा करने का मन बनाया था। पहले वह इनेलो में जिम्मेदारियां संभालते रहे। इसके बाद इनेलो से अलग होकर जजपा बनी तो पार्टी नेतृत्व ने उन्हें नारायणगढ़ का हलका प्रधान बनाया। इसके साथ ही अन्य पद भी दिए। इन जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाया।
इसके बाद विधानसभा चुनाव आने से ठीक पहले हरबिलास ने बसपा की सदस्यता ले ली थी और बसपा इनेलो गठबंधन के उम्मीदवार बनकर नारायणगढ़ में पार्टी को एक बार फिर से खड़ा करने की कोशिश की। चुनावी रैली के दौरान ही बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ भी मंच साझा किया था।
समस्याएं हल कराने में रहते थे आगे
हरबिलास रज्जूमाजरा पिछले कुछ वर्षों से लोगों के बीच काफी सक्रिय थे। लोगों को उनका सौम्य स्वभाव काफी पसंद आता था। स्थानीय लोग बताते हैं कि किसी की भी समस्या हो वह हल कराने के लिए साथ चल दिया करते थे। यही कारण था कि पहली बार विधानसभा चुनाव में उतरते ही उन्होंने चुनाव मैदान में अपनी पैठ बनाई और करीब 28 हजार वोट झटके। शनिवार को अग्रसेन चौक पर जाम के दौरान आक्रोशित लोग उनके इसी व्यवहार की चर्चा कर रहे थे। लोगों का कहना था कि उन्होंने अपने लिए कुछ भी नहीं मांगा मगर लोगों के लिए हर तरीके से मदद की।
रोष में चार घंटे बंद रखा बाजार
नारायणगढ़वासियों और हरबिलास के बीच रिश्ते को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। इसका उदाहरण इसी बात से समझा जा सकता है कि शनिवार को रोष के दौरान नारायणगढ़ में मुख्य बाजार लगभग पूरा ही बंद दिखाई दिया। किसी भी दुकानदार ने एसपी के समझाने तक अपनी दुकानें नहीं खोलीं। जिसको जहां जगह मिली वो वहीं बैठ कर रोष प्रदर्शन करता दिखा।