अंबाला छावनी के हलवाई बाजार में राहुल बंसल घेवर और मलाई वाला घेवर दिखाते हुए। संवाद
अंबाला। हरियाली तीज सावन के महीने में मनाई जाती है। हरियाली तीज पर घेवर, फिरनी, मीठी फिरनी और मलाई घेवर की सबसे ज्यादा मांग रहती है। इसके अलावा अंबाला में कुछ ही स्पेशल दुकानें हैं जहां पर अनरसे और अनरसे की गोलियां बनाई जाती है। यह अरनसे चावल को पीसकर बनाए जाते हैं जो तीज से एक करीब एक सप्ताह पहले बनने शुरू हो जाते हैं, इसके साथ ही घेवर, फिरनी, मीठी फिरनी और मलाई घेवर सावन शुरू होने से पहले करीब 10 दिन पहले बनाए जाते हैं, जो रक्षाबंधन तक बनाए जाते हैं। तीज के दिन इनकी सबसे ज्यादा डिमांड रहती है। तीज पर नवविवाहित बेटियों की ससुराल में सिंधारा दिया जाता है। इस सिंधारे में हरी चूडियां, कपडे़, घेवर, फिरनी, मीठी फिरनी और मलाई घेवर होता है। इस दिन बहुएं सिंधारा अपनी सास को देती हैं।
1950 से चल रही दुकान
राहुल बंसल ने बताया कि वर्ष 1950 में उनके दादा राजाराम गुप्ता ने हलवाई बाजार में मिठाई की दुकान शुरू की थी, इसके बाद यह दुकान उनके पिता विनय कुमार बंसल ने चलाई और अब वह पिछले 12 साल से चलाते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि करीब 35 साल पहले उनके पिता विनय कुमार बंसल ने अंबाला में मलाई घेवर और फिरनी की शुरूआत की थी। तब से वह घेवर, फिरनी, मीठी फिरनी और मलाई घेवर बनाते आ रहे हैं। उनके घेवर की मांग दूर-दूर तक रहती है।
अंबाला छावनी के हलवाई बाजार में राहुल बंसल घेवर और मलाई वाला घेवर दिखाते हुए। संवाद