गायत्री देवी ढौंडियाल को उत्तराखंड आंदोलनकारी के रूप में विशेष सम्मान से सम्मानित करते हुए जिला
अंबाला। मूल रूप से उत्तराखंड निवासी और वर्तमान में अंबाला कैंट में रह रहीं गायत्री देवी ढौंडियाल को उत्तराखंड सरकार की ओर से आंदोलनकारी का आधिकारिक दर्जा प्रदान किया गया है। यह सम्मान उन्हें उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में दिए गए उनके ऐतिहासिक, साहसिक और अविस्मरणीय योगदान की मान्यता के रूप में प्रदान किया गया है। इस सम्मान को पाने के लिए गायत्री देवी को 25 साल संघर्ष करना पड़ा। हाल ही में देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में जिलाधिकारी सिवान बंसल ने उन्हें औपचारिक रूप से आंदोलनकारी का दर्जा प्रदान किया। इस अवसर पर उनके हाथों से पेंशनधारकों के लिए कोषागार भवन का उद्घाटन भी करवाया गया, जो उनके संघर्ष की सरकारी स्तर पर उच्च मान्यता को दर्शाता है। सम्मान प्राप्त करने के बाद गायत्री देवी ढौंडियाल ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए गर्व का विषय है।
शुरुआती चरण से ही लगातार अपना सक्रिय योगदान दिया
जब उत्तराखंड आंदोलन की शुरुआत हुई, तभी गायत्री देवी ढौंडियाल उसमें कूद पड़ीं और शुरुआती चरण से ही लगातार अपना सक्रिय योगदान देती रहीं। उनके साहस, नेतृत्व क्षमता और निरंतर संघर्ष को देखते हुए उत्तराखंड संघर्ष मोर्चा ने वर्ष 1994 में उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया। इसके बाद उन्होंने उत्तराखंड राज्य बनने तक अग्रिम पंक्ति में रहकर हर धरने, प्रदर्शन और आंदोलन को दिशा दी और आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की। गायत्री देवी ढौंडियाल ने जंतर मंतर पर कई वर्षों तक निरंतर धरना दिया और एक समय भोजन ग्रहण करके संघर्ष को जारी रखा। उनकी निष्ठा और समर्पण ने राज्य निर्माण की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर जीवित रखा।
संसद घेराव के दौरान हुई थी गंभीर रूप से घायल
उत्तराखंड वीरों द्वारा आयोजित संसद घेराव के दौरान गायत्री देवी ढौंडियाल अग्रिम मोर्चे पर डटी रहीं। इसी क्रम में उन पर लाठीचार्ज हुआ, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हुईं और बाद में उन्हें डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। आंदोलन के दौरान वे गिरफ्तार भी हुईं, पर उनका साहस और उनका समर्पण कभी नहीं डगमगाया। उनके अप्रतिम योगदान को सम्मानित करते हुए उत्तराखंड सरकार ने उन्हें आंदोलनकारियों की आधिकारिक सूची में शामिल किया।